फैजाबाद : महीना सावन का हो और जिक्र भोले बाबा की पीठ का हो, तो यह गुप्तार घाट स्थित श्री अनादि पंचमुखी महादेव मंदिर नाम अत्यंत प्रमुखता से प्रस्तुत होता है। जैसा कि नाम से ही ध्वनित है, इतिहास भी उसी ओर इशारा करता है। यानी मंदिर में विराजमान भोले बाबा का पंचमुखी विग्रह अनादि है। कोई एक शताब्दी पूर्व यहां अयोध्या के प्रसिद्ध संत कोठा वाले महाराज के शिष्य रामअवतार शरण ने धूनी रमाई और उनकी सेवा-पूजा से प्रसन्न भोले बाबा की ऐसी कृपा हुई कि इस स्थान ने तभी से पीछे मुड़कर नहीं देखा। लखौरी ईटों के प्राचीन मंदिर की जगह बाबा का नयनाभिराम गर्भगृह तैयार हुआ और नियमित देखरेख का परिणाम यह हुआ कि बाबा का विग्रह चैतन्य-चिन्मय स्वरूप में अधिष्ठित हुआ। कालांतर में यहां रामअवतार शरण के शिष्य महंत रमापति शरण विराजे और उनकी साधुता-सरलता से प्रेरित होकर मंदिर के प्रति भक्तों का प्रवाह आकर्षित हुई। कोई दो वर्ष पूर्व रमापति शरण के साकेतवास के उपरांत अयोध्या स्थित प्रसिद्ध पीठ लक्ष्मण किला के महंत मैथिलीरमण शरण ने पंचमुखी महादेव मंदिर के संचालन का दायित्व संभाला। मंदिर का सुव्यवस्थित संचालन और उपासना के नियमित क्रम का चमत्कार ही है कि यह स्थान शिवोपासकों का महत्वपूर्ण ठौर बना हुआ है। गर्भगृह में बाबा का दर्शन और मंदिर के प्रांगण में ध्यानस्थ होना भक्तों के लिए आह्लादकारी होता है। यूं तो किसी अन्य चुनिंदा शिव मंदिर की तरह यहां भी बाबा का अभिषेक करने वालों का तांता लगता है पर मंदिर प्रबंधन बाबा की मर्यादा को लेकर पूर्ण सजग रहता है। अभिषेक का नियत समय होता है। बाकी समय बाबा को पूर्ण चिन्मय मानते हुए उनके श्रृंगार, भोग, विश्राम आदि के लिए संयोजित होता है। हालांकि यहां पहुंचना आसान नहीं है। कैंट इलाके में होने की वजह से यहां के लिए सीधे वाहन नहीं मिलता पर सरयू के पौराणिक गुप्तारघाट तट से लगा होने की वजह से आम श्रद्धालुओं के अलावा स्नानार्थियों के लिए पंचमुखी महादेव दर्शन का नित्य क्रम होता है।

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