अयोध्या: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उम्मीदवारी अयोध्या से न होकर गोरखपुर से होने से रामनगरीवासी भी हतप्रभ हैं। 24 घंटे पहले तक यहां से उनका विधानसभा चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था, लेकिन शनिवार दोपहर में परि²श्य पूरी तरह बदल गया। योगी के चुनाव लड़ने की संभावना के बाद भाजपा में अयोध्या सीट से टिकट के लिए जो नेता अपना जीवनवृत्त तक नेतृत्व को देने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे, अब वे फिर से टिकट की दावेदारी में जुट गए हैं। माना यह भी जा रहा है कि अब अयोध्या में ही टिकट की ज्यादा सिर फुटौव्वल रहेगी। भाजपा के लिहाज से अयोध्या को बेहद सुरक्षित सीट माना जाता है इसलिए भाजपा में टिकट के लिए ज्यादा नेता दावेदारी करेंगे। संभावना तो यहां तक जताई जा रही है कि दावेदारों की संख्या 10-12 से भी ज्यादा हो सकती है।

मौजूदा समय में अयोध्या से वेदप्रकाश गुप्त विधायक हैं। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। उनसे पहले मौजूदा सांसद लल्लू सिंह इसी सीट से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि, लल्लू वर्ष 2012 का चुनाव सपा के तेजनारायण पांडेय पवन से हार गए थे। गत चुनाव में वेदप्रकाश गुप्ता ने फिर से इस सीट को भाजपा की झोली में डाल दिया। गुप्ता इस बार भी टिकट के स्वाभाविक और प्रबल दावेदार हैं। हालांकि, एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि भाजपा वेद के स्थान पर उनके पुत्र अमल गुप्ता को अवसर देगी। इसके अलावा टिकट के दावेदारों में महापौर रिषिकेश उपाध्याय, 22-23 दिसंबर 1949 की रात गर्भगृह में रामलला के प्राकट्य के बाद उनकी उपस्थिति अक्षुण्ण रखने के लिए अपने पद को तिलांजलि देने वाले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह के पौत्र शक्ति सिंह, सांसद लल्लू सिंह के पुत्र विकास सिंह, हनुमानगढ़ी से जुड़े युवा संत राजूदास, व्यापारी नेता सुशील जायसवाल, भाजपा के महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र, भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री हर्षवर्धन सिंह, अभय सिंह आदि टिकट के लिए दावा कर रहे हैं। वहीं इस मसले पर भाजपा के महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र का कहना है कि भाजपा परिवार की भांति है और नेतृत्व जिसका भी नाम तय करेगा, सभी नेता व कार्यकर्ता उसे चुनाव लड़ाएंगे।

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