Move to Jagran APP

ऋषि आस्तिक के क्षमादान के बाद इंद्र के सिंहासन को तक्षक ने छोड़ा था

ऋषि आस्तिक के क्षमादान के बाद इंद्र के सिंहासन को तक्षक ने छोड़ा था आस्तिक आश्रम के बारे में श्रीमद भगवत् पुराण के दशम स्कंध में उल्लेख है कि महाराजा परीक्षित की सर्पदंश से मृत्यु के प्रतिशोध में उनके पुत्र जनमेजय ने पृथ्वी से सर्पों के समूल नाश के लिए यज्ञ का आयोजन किया था।यज्ञ में सभी सर्पों के भस्म हो जाने के बाद तक्षक नामक सर्प देवराज इंद्र के सिंहासन से लिपट गया। यज्ञ में जब तक्षक नाग को भस्म करने का मंत्र उच्चारण किया गया तो इंद्रासन हिल उठा। इसके उपरांत देवताओं के अनुनय विनय करने पर ऋषि आस्तिक ने तक्षक नाग को क्षमादान दे दिया।तभी से मान्यता चली आ रही है कि आस्तिक मुनि की पूजा से नागवंश के आक्रोश से मुक्ति मिल जाती है।मान्यता है कि प्रात बिस्तर से नीचेउतरने से पहले आस्तीक मुनि का नाम लेने से दिनभर सांपबिच्छू से कोई हानि नहीं होगी।इस प्रकार का ²ष्टांत महाभारत की कथा में भी मिलता है।

By JagranEdited By: Published: Tue, 13 Aug 2019 11:21 PM (IST)Updated: Tue, 13 Aug 2019 11:21 PM (IST)
ऋषि आस्तिक के क्षमादान के बाद इंद्र के सिंहासन को तक्षक ने छोड़ा था
ऋषि आस्तिक के क्षमादान के बाद इंद्र के सिंहासन को तक्षक ने छोड़ा था

अयोध्या : आस्तिक आश्रम के बारे में श्रीमद् भागवतपुराण के दशम स्कंध में उल्लेख है कि महाराजा परीक्षित की सर्पदंश से मृत्यु के प्रतिशोध में उनके पुत्र जनमेजय ने पृथ्वी से सर्पों के समूल नाश के लिए यज्ञ का आयोजन किया था। यज्ञ में सभी सर्पों के भस्म हो जाने के बाद तक्षक नामक सर्प देवराज इंद्र के सिंहासन से लिपट गया।

loksabha election banner

यज्ञ में जब तक्षक नाग को भस्म करने का मंत्र उच्चारण किया गया तो इंद्रासन हिल उठा। इसके उपरांत देवताओं के विनय करने पर ऋषि आस्तिक ने तक्षक नाग को क्षमादान दे दिया। तभी से मान्यता है कि आस्तिक मुनि की पूजा से नागवंश के आक्रोश से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि प्रात: बिस्तर से नीचे उतरने से पहले आस्तीक मुनि का नाम लेने से दिनभर सांप-बिच्छू से कोई हानि नहीं होगी।

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप


Jagran.com अब whatsapp चैनल पर भी उपलब्ध है। आज ही फॉलो करें और पाएं महत्वपूर्ण खबरेंWhatsApp चैनल से जुड़ें
This website uses cookies or similar technologies to enhance your browsing experience and provide personalized recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.