संवादसूत्र, ऊसराहार : ताखा ब्लाक में डेंगू का प्रकोप थम नहीं रहा है। रजपुरा गांव में तेज बुखार आने से एक किशोर की मौत हो गई। उसमें डेंगू बुखार के लक्षण बताए गए हैं।

क्षेत्र में वायरल बुखार और डेंगू का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। शनिवार की शाम रजपुरा निवासी ब्रज बिहारी कश्यप के 16 वर्षीय पुत्र गौतम को अचानक तेज बुखार आया। गौतम के स्वजन पहले इटावा प्राइवेट अस्पताल में ले गए। तेज बुखार को देख डाक्टर ने इलाज से मना कर दिया तो स्वजन आगरा के लिए भागे। आगरा पहुंचने से पहले रास्ते में ही गौतम की मृत्यु हो गई। वह कक्षा नौ का होनहार छात्र था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। पिता परिवार पालने के लिए दिल्ली में नौकरी करते हैं। इसी गांव में बुखार से सौरभ, दीपक, ओमबाबू, राम प्रकाश, विशाल राज, गेंदालाल अभी भी पीड़ित हैं, जबकि भगवंतपुर निवासी अमरपाल सिंह की पत्नी गुड्डी देवी को डेंगू के लक्षण बताए गए हैं। ऊसराहार में अभी भी 12 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। ऊसराहार-भरथना मार्ग पर पानी का निकास न होने से नालियों में पानी भरा होने के कारण फैली गंदगी से इस मार्ग पर डेंगू के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। प्रशासन पानी के निकास की कोई व्यवस्था तक नहीं कर पा रहा है।

स्टेशन अधीक्षक समेत कई अधिकारी और कर्मी डेंगू से पीड़ित : स्वास्थ्य विभाग भले ही डेंगू को नकार रहा है लेकिन धरातल पर डेंगू बुखार से ग्रस्त लोगों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। इससे अब रेलवे कालोनी भी अछूती नहीं रही। बीते सप्ताह से रोजाना करीब छह लोगों की रिपोर्ट डेंगू पाजिटिव आ रही है। स्टेशन अधीक्षक पीएम मीना भी डेंगू के शिकार हो गए हैं। इतना सब होने के बावजूद रेलवे के स्वास्थ्य विभाग ने कालोनियों में एंटी लार्वा और कीटनाशक का छिड़काव तक नहीं कराया है। इससे डेंगू तथा वायरल फीवर तेजी से फैल रहा है।

इटावा जंक्शन की रेलवे कालोनी मनोरंजन सदन सहित अन्य कालोनियों में रहने वाले अधिकतर लोग डेंगू के शिकार हो रहे हैं। पीडब्लूआइ शशिप्रकाश मीना ने बताया कि रोजाना पांच-छह रेलवे कर्मी या अधिकारी डेंगू के शिकार हो रहे हैं। बीते सप्ताह से हालात बहुत खराब बने हुए हैं। कई लोग तो उपचार कराने के लिए आगरा और कानपुर चले गए हैं। रेलवे की सभी कालोनियों में गंदगी की भरमार होने से हालात काफी खराब बने हुए हैं। मच्छरों व अन्य जहरीले कीड़ों से कालोनियों में रहने वालों का जीना दुश्वार बना हुआ है। बड़ों के साथ बच्चे भी डेंगू और वायरल फीवर के शिकार हो रहे हैं। संचारी रोगों से बचाव के लिए इन कालोनियों में छिड़काव तक नहीं कराया गया है जिससे हालात काफी बदतर बने हुए हैं।

Edited By: Jagran