जासं, इटावा : भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व यमुना यात्रा लेकर निकले राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक केएन गोविदाचार्य ने कहा कि प्रकृति को ध्यान में रखकर विकास किया जाए। नदियां बेहद महत्वपूर्ण हैं, नदी संरक्षण के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। गोविदाचार्य अपनी यमुना दर्शन यात्रा एवं प्रकृति केंद्रित विकास संवाद के तहत यमुना नदी के किनारे बसे नगरों के भ्रमण पर हैं। इसी के तहत वह गुरुवार को यहां यमुना किनारे स्थित सुमेर सिंह किला गेस्ट हाउस में आए हुए थे। उन्होंने मीडिया से वार्ता में कहा कि भारत की असली ताकत प्रकृति है और प्रकृति की अनदेखी कर देश का विकास संभव नहीं है। प्रकृति को ध्यान में रखकर देश का विकास करना होगा, अन्यथा प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ना स्वाभाविक है। गोवंश हमारे अध्यात्म का आधार है, इनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। सिर्फ गोवंश की रक्षा की घोषणा से कुछ नहीं होगा, इनके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि नदियां केवल मनुष्य के उपयोग के लिए नहीं हैं। नदियों का स्वतंत्र अस्तित्व है। नदियों के लिए कानून बनाए जाने चाहिए। नदियों को लेकर भी अतिक्रमण परिभाषित किया जाना चाहिए। नदियों के कुछ दूर तक नदी की जमीन हो। यह बेहद जरूरी है। इसके साथ ही नदियों के किनारे पौधारोपण भी किया जाना चाहिए। वृंदावन में यमुना मिशन की ओर से यमुना नदी के किनारे आठ किमी तक पौधे लगाए गए हैं। गोविदाचार्य ने केंद्र की मोदी सरकार की सराहना करते हुए जम्मू-काश्मीर से धारा 370 का समाप्ति, तीन तलाक का कानून, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की शुरुआत को ऐतिहासिक कदम बताया। वार्ता के दौरान जिला संघचालक राम नरेश शर्मा, विनोद चंद्र पांडे, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव राजपूत, अन्नू गुप्ता, रोहित शाक्य मौजूद रहे।

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