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    आरक्षण का पता नहीं, सज गए मोर्चे

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    Updated: Wed, 01 Jul 2015 12:58 AM (IST)

    इटावा, जागरण संवाददाता : जनपद में पंचायत चुनाव को लेकर अभी तिथि की घोषणा जरूर नहीं हुई पर दावेदारों

    इटावा, जागरण संवाददाता : जनपद में पंचायत चुनाव को लेकर अभी तिथि की घोषणा जरूर नहीं हुई पर दावेदारों के मोर्चे सज गए हैं। दावेदारों द्वारा गांवों में कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर पंचायत राज विभाग को अभी भी शासनादेश का इंतजार है। जबकि दावेदार रैपिड सर्वे शुरू होते ही अपनी इच्छानुसार आरक्षण कराने के लिए राजनेताओं से लेकर अफसरों तक पहल कर रहे हैं।

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    जिले की 16 लाख ग्रामीण आबादी में पिछड़ी जातियों की स्थिति का आकलन इस समय किया जा रहा है। हालांकि छोटी संसद के लिए किसी भी दल ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। परंतु पर्दे के पीछे से सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस द्वारा गांव-गांव में जातिगत आधार पर गोटें बिछाना शुरू कर दी गई हैं। नये परिसीमन में जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत के वार्डों के सदस्य भी दावेदारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

    गांवों में सजने लगीं चौपालें

    गांवों में चौपालें सजने लगी हैं। लोग अभी से शाम को कामों से निवृत्त होने के बाद चौपालों पर मिनी संसद की चर्चा में मशगूल हैं। हालांकि चुनाव अक्टूबर में प्रस्तावित है परंतु प्रधानी के दावेदारों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। आरक्षण क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है परंतु दावेदार मतदाताओं के सुख दुख को साझा करके हमदर्द साबित करने में जुटे हैं।

    आस्था को भी भुना रहे

    दावेदार लोगों की आस्था को भुनाने का मौका नहीं छोड़ रहे। गांवों में इन दिनों हो रही कथा भागवत का खर्च भी वह उठा रहे हैं। मंशा इन कार्यक्रमों में जुटने वाले मतदाताओं की हमदर्दी हासिल करना है।

    पिछली बार क्या थी आरक्षण व्यवस्था

    नई व्यवस्था के तहत पंचायत चुनाव वर्ष 1995 में शुरू किया गया था, इसमें 33 फीसद महिलाएं, 27 फीसद पिछड़ों तथा 22 फीसद अनुसूचित-जनजाति वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की गई थीं। आरक्षण की प्रक्रिया चक्रानुक्रम में निर्धारित की गई थी। इसके तहत हर ग्राम पंचायत नंबर आने पर आरक्षित की जानी चाहिए पर अक्सर ऐसा होता नहीं है। प्रभावशाली लोग सत्ता पक्ष का सहारा लेकर अपनी मर्जी के मुताबिक आरक्षण कराने में सफल हो जाते हैं।

    51 नई ग्राम पंचायतों का हुआ गठन

    वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में 420 ग्राम पंचायतें जनपद में थीं। जिनकी संख्या बढ़कर अब 471 हो गई है। जिले के 8 ब्लाकों में नई ग्राम पंचायतें बनाई गई हैं। पिछली बार जिला पंचायत सदस्य 21, क्षेत्र पंचायत सदस्य 489, ग्राम प्रधान 420 तथा ग्राम पंचायत सदस्य 5252 चुने गए थे। इन पंचायतों में दावेदारों में पहली बार चुनाव को लेकर गजब का उत्साह है।

    जो चुने जाने हैं

    ग्राम प्रधान--471

    जिला पंचायत सदस्य--24

    क्षेत्र पंचायत सदस्य--587

    ग्राम पंचायत सदस्य--5911

    क्या कहते हैं जिम्मेदार

    रैपिड सर्वे का कार्य पूरा नहीं हुआ है, इससे आरक्षण प्रक्रिया में देर है। यह प्रक्रिया अगस्त माह में शुरू होने की संभावना है। आरक्षण प्रक्रिया नियमानुसार ही कराई जायेगी। आरक्षण मनमर्जी के मुताबिक नहीं होगा, नियमों के विपरीत कार्य नहीं होगा।

    -एमएल यादव जिला पंचायत राज अधिकारी।