राज किशोर गुप्ता, ताखा: आप भले ही विश्वास न करें लेकिन यह सत्य है क्षेत्र में एक गांव ऐसा भी है जब होली की पड़वा के दिन गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बिच्छुओं के साथ होली खेलते हैं। इस दिन बिच्छू किसी को काटते नहीं हैं। गांव के किनारे बने भैसान टीला पर फाग की थाप ढोलक पर पड़ते ही बिच्छू निकल पड़ते हैं। ऐसा नहीं है कि बिच्छू नहीं काटते, होली की पड़वा को छोड़ शेष दिनों में इनका जहर सिर चढ़कर बोलता है। ताखा तहसील क्षेत्र के सौंथना गांव में कई वर्षों से भैसान देवी के टीला पर सैकड़ों की संख्या में बिच्छू निकलते हैं। इन बिच्छुओं को बच्चे व बुजुर्ग हाथों में लेकर घूमते हैं और बिच्छू मदमस्त होकर पूरे शरीर पर रेंगते हैं। होली की पड़वा के दिन सायं 5 बजे के आसपास ग्रामीण अपनी परंपरा के अनुसार भैसा देवी के टीला पर आखत डालने पहुंचते हैं। बुजुर्ग जैसे ही फाग की शुरूआत करेंगे वैसे ही बच्चे से लेकर बूढ़े तक टीले पर पड़े पत्थर के टुकड़ों को उठाना शुरू कर देंगे। इन पत्थरों के नीचे बैठे जहरीले बिच्छुओं को लोग अपने हाथों में उठा लेते हैं। उन्हें डर भी नहीं लगता है। घटना के पीछे का रहस्य क्या है यह कोई ग्रामीण नहीं बता पाया है।

गांव के शिक्षाविद् कृष्ण प्रताप ¨सह भदौरिया कहते हैं कि यह अंधविश्वास नहीं है। वर्षों से हम यह देखते आ रहे हैं। पुरानी जमीदारी प्रथा में यहां पर भैंसों की बलि दी जाती थी। किसी समय यहां पर महष मर्दनी का मंदिर हुआ करता था। उस समय से ही यहां पर बिच्छू निकलते आ रहे हैं। कृष्ण प्रताप बताते हैं कि टीले पर हजारों की संख्या में पत्थर पड़े हुए हैं। इन पत्थरों के बीच में ही बिच्छू रहते हैं। गांव के शौकीन अली का कहना है कि कोई बिच्छू किसी को नहीं काटता। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में बिच्छू इस टीले पर निकलते हैं।