एटा-कासगंज में सपा की अंदरूनी रार से बिगड़ा संगठन का गणित: एकजुट करने की चुनौती, अखिलेश के सामने भिड़े थे सपाई
एटा और कासगंज में समाजवादी पार्टी संगठनात्मक संकट से जूझ रही है, जहाँ जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में देरी और नेताओं ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
एटा-कासगंज में सपा जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में देरी, संगठन संकट।
अखिलेश यादव के सामने नेताओं की झड़प से कमेटियां भंग।
संगठनात्मक खींचतान के कारण विधानसभा चुनाव की तैयारी प्रभावित।
अनिल गुप्ता, एटा। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी एटा और कासगंज में संगठनात्मक संकट से जूझ रही है। दोनों जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति लंबे समय से अटकी है। लखनऊ में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने दो पार्टी नेताओं के बीच हुई तकरार के बाद जिला कमेटियां भंग कर दी गई थीं। इसके बाद नए सिरे से संगठन खड़ा नहीं हो सका है।
एक ओर जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों के बीच खींचतान जारी है, वहीं दूसरी ओर संगठन की कमान खाली होने से चुनावी तैयारियों की रफ्तार प्रभावित है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को शिकस्त देकर उत्साहित सपा के सामने अब अपने ही संगठन को एकजुट करने की चुनौती है।
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति अटकी, खींचतान के बीच खाली है संगठन की कमान
दरअसल, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एटा और कासगंज के संगठन से जुड़े नेताओं को 19 सितंबर को लखनऊ बुलाया था। बैठक का उद्देश्य एटा की चार और कासगंज की तीन विधानसभा सीटों के लिए संभावित प्रत्याशियों के संबंध में फीडबैक लेना था। इसी दौरान एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव और विधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रमेश यादव के भतीजे मंजीत यादव के बीच विवाद हो गया।
कहासुनी से शुरू हुआ मामला गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इसे गंभीरता से लेते हुए करीब एक घंटे बाद दोनों जिलों की कमेटियां भंग कर दीं। तब से दोनों जिलों में नई कमेटियों का गठन नहीं हो पाया है।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता है असर
सपा के अंदरखाने जिलाध्यक्ष पद के लिए जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर नामों पर विचार चल रहा है। एटा में इस बार यादव चेहरे को जिलाध्यक्ष बनाने की चर्चा है। यहां सभासद सुनील यादव और जिला पंचायत सदस्य अनिल यादव के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। हालांकि मुस्लिम चेहरे के रूप में शराफत हुसैन काले, पूर्व जिलाध्यक्ष अशरफ हुसैन और जहीर अहमद के नाम भी चर्चा में हैं।
कासगंज में इन नामों की चर्चा
कासगंज में मुस्लिम जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा है। यहां हसरतउल्ला शेरवानी और चाहत मियां के नाम सामने आ रहे हैं। शेरवानी को पूर्व सांसद कुंवर देवेंद्र सिंह यादव का करीबी बताया जाता है। ऐसे में उनकी दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। इसके अलावा राजकुमार यादव, जितेंद्र यादव और लक्ष्मण सिंह यादव के नाम भी चर्चा में हैं। पूर्व सांसद कुंवर देवेंद्र सिंह यादव हाल ही में 12 जून को दोबारा सपा में शामिल हुए हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान वह भाजपा में चले गए थे। अब उनकी वापसी के बाद कासगंज में जिलाध्यक्ष के चयन में उनकी राय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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संगठन का गठन नहीं होने से प्रभावित होगा चुनाव
सपा के युवा नेता और सभासद सुनील यादव का कहना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण दोनों जिलों में संगठन का गठन नहीं होना तैयारियों को प्रभावित कर सकता है। पार्टी नेता शराफत हुसैन काले भी मानते हैं कि संगठन नहीं होने से चुनावी तैयारियों में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी देवेश शाक्य ने भाजपा के राजवीर सिंह को पराजित किया था। इस जीत से एटा लोकसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का उत्साह बढ़ा है। इस क्षेत्र में एटा और कासगंज दोनों जिले आते हैं। ऐसे में संगठन को मजबूत करने के बजाय नेतृत्व की नियुक्तियों में देरी और आपसी खींचतान पार्टी की तैयारियों के लिए चुनौती है।
