आपदा में रक्षक, खेतों में मददगार, देवरिया के छात्रों ने बनाया अनोखा 'वायुपुत्र ड्यूल'
राजकीय पालीटेक्निक देवरिया के छात्रों ने 'वायुपुत्र ड्यूल' नामक एक विशेष ड्रोन मॉडल विकसित किया है। यह आपदा प्रभावित क्षेत्रों ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।
HighLights
राजकीय पालीटेक्निक देवरिया के छात्रों ने 'वायुपुत्र ड्यूल' ड्रोन बनाया।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश में सहायक होगा।
आधुनिक खेती में फसल निगरानी और छिड़काव में उपयोगी है।
विनीत मल्ल, देवरिया। आपदा के समय हर मिनट कीमती होता है। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन या चक्रवात में जब सड़कें टूट जाती हैं, बिजली गुल हो जाती है और मोबाइल नेटवर्क जवाब दे जाता है, तब मलबे या पानी के बीच फंसे लोगों तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन जाता है। इस चुनौती का तकनीकी समाधान तलाशते हुए राजकीय पालीटेक्निक देवरिया के विद्यार्थियों ने एक खास ड्रोन का ‘माडल’ तैयार किया है, जिसे नाम दिया है ‘वायुपुत्र ड्यूल’।
यह आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर फंसे लोगों की तलाश करने, उनकी स्थिति का पता लगाने और बचाव दल तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने में मदद करेगा। इसकी खासियत यह है कि आपदा प्रबंधन के साथ आधुनिक खेती में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।
विद्यार्थियों ने इस परियोजना को दोहरी उपयोगिता को ध्यान में रखकर तैयार किया है। आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्र का लाइव वीडियो और जरूरी डेटा जुटाकर जोखिम वाले स्थानों की पहचान करने की परिकल्पना की गई है। एआइ तकनीक, मोशन सेंसर और वाइडबैंड एंटीना ऐरे की मदद से लोगों की वास्तविक स्थिति और लोकेशन का पता लगाने तथा इसकी सूचना राहत दल तक पहुंचाने की व्यवस्था इसमें शामिल है।
इससे बचाव दल को सही स्थान पर पहुंचने और समय रहते लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद मिल सकती है। प्रोजेक्ट टीम में इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष के छात्र संचीत श्रीवास्तव और खुशी तिवारी तथा द्वितीय वर्ष की छात्राएं नंदनी गुप्ता, अंजली प्रजापति और शीतल सिंह शामिल रहीं। जिसे संस्था के सेवायोजन अधिकारी और प्रवक्ता नरेंद्र मोहन मिश्र के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।
नेटवर्क ठप होने पर भी सूचना पहुंचाने की तैयारी
आपदा के समय अक्सर मोबाइल नेटवर्क प्रभावित हो जाता है। बिजली आपूर्ति ठप होने और सड़कें क्षतिग्रस्त होने से राहत दलों को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने में भी दिक्कत होती है। ऐसे हालात में ‘वायुपुत्र ड्यूल’ के जरिए हवाई सर्वेक्षण, लाइव वीडियो और डेटा संग्रह कर बचाव कार्यों के लिए उपयोगी सूचनाएं जुटाई जा सकेंगी।
इसके तकनीकी ढांचे में आरजीबी कैमरा, थर्मल कैमरा, लाइडर/रेंज सेंसर, जीएनएसएस/आरटीके पोजिशनिंग और मोशन सेंसर की परिकल्पना की गई है। इनकी मदद से प्रभावित क्षेत्र का दृश्य और तापीय आकलन करने के साथ संभावित जोखिम वाले स्थान चिह्नित किए जा सकेंगे। इससे नेटवर्क की अनुपलब्धता या बाधित संचार की स्थिति में भी बचाव दल तक सूचनाएं पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
खेती में भी किसानों का मददगार बनेगा ड्रोन
इस परियोजना का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष कृषि है। इसके माध्यम से धान, गेहूं और गन्ने जैसी फसलों की निगरानी करने, छिड़काव करने और फसल की स्थिति का आकलन करने की संभावनाएं प्रस्तुत की गई हैं। भविष्य में मल्टीस्पेक्ट्रल और थर्मल इमेजिंग के साथ एआइ आधारित विश्लेषण तकनीक जोड़कर फसलों में रोग, कीट और पोषक तत्वों की कमी की शुरुआती पहचान भी की जा सकेगी।
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प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में मिली सराहना
27 और 28 अक्टूबर को लखनऊ में अविष्कार फाउंडेशन की ओर से आयोजित प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में ‘वायुपुत्र ड्यूल’ की सराहना हुई। प्रतियोगिता में प्रदेश के 40 से अधिक जिलों के विद्यार्थियों ने अपने मॉडल और तकनीकी परियोजनाएं प्रस्तुत की थीं। राजकीय पालीटेक्निक देवरिया के विद्यार्थियों ने परियोजना की उपयोगिता, तकनीकी अवधारणा और सामाजिक महत्व को प्रभावी ढंग से रखा। इससे पहले जिला स्तरीय प्रतियोगिता में आठ कालेजों के बीच इस प्रोजेक्ट को प्रथम स्थान मिला था।
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