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देवरिया शिक्षक सुसाइड मामला: जिस न्याय के लिए पति लड़ते रहे, फैसला आया तो वह नहीं रहे

Published: Wed, 07 Oct 2026 11:41 AM (IST)

न्याय की लंबी लड़ाई के बाद देवरिया के तीन शिक्षकों की सेवा बहाल हुई, पर कृष्णमोहन सिंह को यह देखने ...और पढ़ें

कृष्णमोहन सिंह की फाइल फोटो। जागरण

 कृष्णमोहन सिंह की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. कृष्णमोहन सिंह की सेवा बहाली का आदेश उनकी मौत के बाद आया।

  2. पत्नी गुड़िया सिंह को पति की मौत के आठ माह बाद मिला आदेश।

  3. तत्कालीन बीएसए पर कृष्णमोहन की आत्महत्या के गंभीर आरोप लगे।

पवन कुमार मिश्र, देवरिया। न्याय की जिस उम्मीद में तीन शिक्षक पौने पांच वर्ष तक व्यवस्था के दरवाजे खटखटाते रहे, उसका फैसला मंगलवार को आखिरकार उनके हाथ में आया। लेकिन इस फैसले को देखने के लिए कृष्णमोहन सिंह इस दुनिया में नहीं हैं। हाई कोर्ट के आदेश के करीब 20 माह बाद विभाग ने अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और कृष्णमोहन सिंह के प्रकरण का निस्तारण करते हुए सेवा बहाल करने का आदेश जारी किया।

पति की मौत के बाद आदेश की प्रति हाथ में आते ही गुड़िया सिंह फफक पड़ीं। उनकी आंखों से निकले आंसुओं में वर्षों का संघर्ष, इंतजार और उस न्याय की टीस थी, जो पति को जिंदा रहते नहीं मिल सका।

2016 में मिली नौकरी, पांच साल बाद खत्म कर दी गई सेवा
कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरीबाजार में सहायक अध्यापकों के तीन पदों पर नियुक्ति के लिए वर्ष 2016 में विज्ञापन निकला था। चयन समिति ने अपर्णा तिवारी, कृष्णमोहन सिंह और ओंकार सिंह का चयन किया। तत्कालीन बीएसए ने 16 मई 2016 को चयन को मंजूरी दी। 22 मई को नियुक्ति पत्र जारी हुआ और तीनों ने एक जुलाई 2016 को कार्यभार ग्रहण किया।

बाद में एसटीएफ फील्ड यूनिट गोरखपुर की जांच के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू हुई। 23 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन बीएसए ने तीनों के चयन और अनुमोदन को शून्य घोषित करते हुए निरस्त कर दिया। इसके बाद प्रबंध समिति ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। शिक्षक हाई कोर्ट पहुंचे। चार अप्रैल 2022 को न्यायालय ने नियमानुसार जांच के निर्देश दिए। शिक्षकों का आरोप था कि विभागीय कार्रवाई में उन्हें समुचित अवसर नहीं मिला।

आरोप पत्र देने के बाद न सुनवाई की तिथि तय हुई, न गवाहों से जिरह का मौका मिला और न जांच रिपोर्ट की प्रति दी गई। इसके बाद सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया। वर्ष 2023 में तीनों ने फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 13 फरवरी 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीएसए के 24 मार्च और एक अप्रैल 2023 के सेवा समाप्ति आदेश निरस्त कर दिए।

बीएसए की प्रताड़ना से तंग आकर शिक्षक कृष्णमोहन की थी आत्महत्या
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी करीब 20 माह तक उसके अनुपालन का इंतजार चलता रहा। इसी दौरान कुशीनगर के हरैया बुजुर्ग निवासी कृष्णमोहन सिंह ने 21 फरवरी 2026 को गुलरिहा क्षेत्र में अपने बड़े भाई के घर फंदे से लटककर आत्महत्या कर लिया। पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर तत्कालीन निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस जांच में कृष्णमोहन की जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला।

इसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए दोनों को जिम्मेदार ठहराया था। आरोपों के अनुसार, हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के नाम पर तीनों शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। मामले में पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह भी गोरखपुर जेल में निरुद्ध हैं।

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जांच के दौरान पटल परिवर्तन को बताया देरी की वजह
23 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्णमोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण की जांच के दौरान स्थानीय और लखनऊ से आई समिति के समक्ष तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल ने निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव से हाई कोर्ट के 13 फरवरी 2025 के आदेश के अनुपालन में हुए विलंब का कारण पूछा था। बीएसए ने पटल परिवर्तन को देरी का कारण बताया कर पल्ला झाड़ लिया।

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