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    देवरिया में राज्यमंत्री-मंदिर भूमि विवाद में पैमाइश के लिए पहुंची प्रशासन की टीम, भारी पुलिस बल तैनात

    देवरिया में राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम और मनोकामना पूर्ण मंदिर के उत्तराधिकारी राजेश नारायण दास के बीच भूमि विवाद गहरा गया है। प्रशासन ने विवादित भूमि की पैमाइश शुरू कर दी है जिसके लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मंदिर के उत्तराधिकारी का आरोप है कि राज्य मंत्री ने मंदिर की भूमि पर कब्जा किया है।

    By Jagran News Edited By: Vivek Shukla Updated: Fri, 29 Aug 2025 10:11 AM (IST)
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    मौके पर डीएम पहुंची हैं, गांव में पुलिस बल तैनात है। जागरण

    जागरण संवाददाता, देवरिया। राज्य मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम व मनोकामना पूर्ण मंदिर के उत्तराधिकारी राजेश नारायण दास के बीच भूमि विवाद में पैमाइश के लिए प्रशासन की टीम मंदिर मंत्री आवास पर पहुंची है। प्रशासन की टीम शुक्रवार की सुबह भारी पुलिस बल के साथ विवादित भूमि पर पहुंची है।

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    एडीएम प्रशासन जैनेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व रामशंकर सिटी, मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडिशनल एसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में दोनों ही पक्षों से बातचीत के बाद पैमाइश शुरू हो चुकी है। सुरक्षा के मद्देनजर हनुमान मंदिर और राज्यमंत्री के आवास के आसपास लगभग 500 पुलिसकर्मी तैनात है।

    सभी की निगाहें पिछले कुछ दिनों से इस प्रकरण पर लगी हुई है। जब्तीकरण के कारण राज्य मंत्री की चहारदीवारी का निर्माण कार्य रुका हुआ है। शहर के मनोकामना हनुमान मंदिर के समीप राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम की भूमि है।

    वह बैनामा कराए गए भूमि की चहारदीवारी निर्माण करा रही थीं। पूरब तरफ भीटा की भूमि की ओर से गेट खोलने के विरोध में मनोकामना पूर्ण हनुमान मंदिर के उत्तराधिकारी राजेश नारायण दास 19 अगस्त को सीसी रोड पर धरने पर बैठ गए थे। उनका आरोप था कि राज्य मंत्री ने मंदिर की भूमि पर कब्जा किया है। उसे मुक्त कराया जाए।

    दोनों पक्षों में विवाद गहराता देखकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 164 के तहत राज्यमंत्री की भूमि को जब्त कर लिया है। जिसके विरोध में राज्यमंत्री के समर्थकों ने हंगामा किया था। इस प्रकरण में मंदिर के महंत परमात्मा दास की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी भी भेजी गई थी।

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    जिसके बाद 20 अगस्त को राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने भी सीएम से लखनऊ में मुलाकात की थी व दावा किया कि जिस आराजी नंबर 2905 व 2906 को उत्तराधिकारी अपनी भूमि बता रहे हैं, वह भूमि भी उनके (राज्यमंत्री के) पूर्वजों के नाम से पुराने दस्तावेजों में आज भी अंकित है। जिस पर विधिक कार्यवाही चल रही है। आरोप है कि वर्तमान में खतौनियों में फ्राड कर नाम दर्ज करा लिया है।