Chitrakoot Flood Alert: चित्रकूट में 36 घंटे की बारिश से मंदाकिनी खतरे के पार, गुप्त गोदावरी में भी बाढ़, स्कूलों में छुट्टी के आदेश
चित्रकूट में 36 घंटे की लगातार बारिश से मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जो खतरे को पार ...और पढ़ें

रामघाट के पास दुकानों से होकर गुजरता मंदाकिनी का पानी। वीडियो ग्रैब
HighLights
रामघाट में शाम को एक घंटे में 45 सेमी की रफ्तार से बढ़ा जलस्तर, खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची नदी
रसिन बांध 97.87 प्रतिशत भरा, स्पिल-वे से 266 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा, बरुआ बांध के गेट खोलने की तैयारी
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। 29 अगस्त की रिकार्ड बाढ़ की विभीषिका को जनपदवासी अभी भूल भी नहीं पाए हैं कि लगातार 36 घंटे से हो रही बारिश ने एक बार फिर मंदाकिनी खतरे के निशान 126.500 मीटर को पार कर गई है। शुक्रवार रात नौ बजे रामघाट में नदी का जलस्तर 127.000 मीटर पर पहुंच गया।
मंदाकिनी आरती स्थल और घाट सीढ़ियां डूब गई है। रामघाट की दुकानों में पानी घुस गया है। उधर, गुप्त गोदावरी में भी बाढ़ की स्थिति है। गुफा से तेज और विकराल जलधारा बाहर निकल रही है। बरदहा नदी में बाढ़ से मानिकपुर से सतना एमपी को जोड़ने वाले मार्ग का टिकरिया रपटा बह गया है।

रसिन बांध में छोड़ा गया पानी। स्थानीय
प्रशासन ने बैरिकेड कर आवागमन रोक दिया है। लगातार बारिश का असर बांधों पर भी दिखाई देने लगा है। रसिन बांध 97.87 प्रतिशत भर चुका है और उसके स्पिल-वे से 266 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। गुंता बांध 83.60, ओहन 82.19 और बरुआ बांध करीब 82 प्रतिशत भर चुका है। बरुआ बांध में जलस्तर बढ़ने पर स्पिल-वे के गेट कभी भी खोले जा सकते हैं। सिंचाई विभाग ने बरुआ नदी के आसपास बसे छह गांवों को सतर्क कराने के लिए प्रशासन को पत्र भेजा है।
रामघाट की दुकानें हुई जलमग्न, निचले इलाकों में अलर्ट
जलस्तर बढ़ने से रामघाट की दुकानें डूब गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क किया गया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने रामघाट पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। सदर एसडीएम अजय यादव और सीओ सिटी सत्येंद्र सिंह मौके के हालात पर नजर रखने के लिए कैंप कर रहे हैं। प्रशासन और सिंचाई विभाग लगातार नदी व बांधों के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं।
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अभी भूले नहीं ये मंजर
मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि 29 अगस्त को नदी ने 135.200 मीटर का रिकार्ड जलस्तर छुआ था। उस बाढ़ में मध्य प्रदेश के हनुमानधारा जाने वाला पुल बह गया था। रामघाट का तुलसी मंदिर धराशायी हो गया था और गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हुई थी। 400 से अधिक दुकानों और दो हजार से अधिक मकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। रामघाट समेत निचले इलाके तीन दिन तक जलमग्न रहे थे। उस बाढ़ की तबाही के बाद दोबारा बढ़ रहा जलस्तर स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है।
सतना में भी लगातार बारिश
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एसके प्रसाद ने बताया कि मध्य प्रदेश के सीमावर्ती सतना जिले में भी लगातार बारिश हो रही है। शाम पांच बजे के बाद करीब 45 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से जलस्तर बढ़ रहा है। तुलसी कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार जनपद में 36 घंटे में 66 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है।
बारिश से खेतों में भी बढ़ी चिंता
लगातार बारिश से जिले के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है। उड़द और तिल की फसल को नुकसान की आशंका है, जबकि धान के लिए बारिश को उपयोगी माना जा रहा है। प्रशासन की नजर अब एक ओर मंदाकिनी और बांधों के बढ़ते जलस्तर पर है, तो दूसरी ओर निचले इलाकों और गांवों में संभावित जलभराव पर भी निगरानी रखी जा रही है।
आठ तक के स्कूलों की छुट्टी
बारिश के बीच शुक्रवार को बच्चे भीगते हुए आते जाते दिखे। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार शनिवार को भी बारिश है ऐसे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रंजना शुक्ला ने एक से आठ तक के सभी सरकारी और गैर सरकारी सहित मान्यता प्राप्त स्कूलों की छुट्टी कर दी है।
टिकरिया का रपटा फिर बहा, एमपी का संपर्क कटा
यूपी और एमपी के पहाड़ी व जंगल क्षेत्र में गुरुवार रात से हो रही बारिश के चलते पाठा क्षेत्र में बरदहा नदी उफान पर आ गई। बांधों के लबालब भरने से पानी नदी में छोड़े जाने के कारण शुक्रवार शाम करीब पांच बजे मानिकपुर-इटवा डुडैला मार्ग पर टिकरिया के पास बना रपटा फिर बह गया। इससे सतना को जोड़ने वाले मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। यह रपटा 29 अगस्त की बाढ़ में दो बार बह चुका है।
बैरिकेड लगाकार रोका आवागमन
शुक्रवार को दोबारा पानी बढ़ने से रपटा बह गया और जिससे मध्यप्रदेश का संपर्क कट गया है। मारकुंडी थाना पुलिस ने रपटे के दोनों तरफ बैरिकेड कर आवागमन रोक दिया तथा दो सिपाहियों को तैनात किया। एसडीएम विपिन द्विवेदी ने प्रधान और रोजगार सेवक को निगरानी के निर्देश दिए हैं। चमरौंहा समेत कई स्थानों पर रपटों के ऊपर से पानी बहने से करीब एक दर्जन गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
