जासं, चकिया (चंदौली): नक्सल प्रभावित इलाके में ताल तलैयों की कमी नहीं। परंतु मई माह के दूसरे पखवारे में ही इनमें पानी नदारद है। इससे आम जन के साथ ही पशु पक्षी बेहाल हो गए हैं। काशी वन्य जीव प्रभाग के चंद्रप्रभा वन्य जीव बिहार में पल बढ़ रहे वन्य जीवों की हालत पतली हो गई है। कहने को तो वन विभाग ने दर्जनों चैक डैम का निर्माण लाखों रुपये खर्च कर बनवाया है। लेकिन स्थिति बेहद ही खराब है।

गर्मी के दिनों में पशु पक्षियों व वन्य जीवों के लिए पानी की कमी न हो इसके मद्देनजर वन विभाग ने चेक डैम का निर्माण कराया। उद्देश्य था कि बरसात के दिनों में चेक डैम में पानी इकठ्ठा हो जाएगा। जिसका उपयोग गर्मी के दिनों में पशु पक्षी कर सकेंगे। लाखों रुपयों की लागत से चकिया व नौगढ़ के जंगलों में करीब एक दर्जन चेक डैम बनवाए गए। निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी के चलते यह चेक डैम मात्र शो पीस बनकर रह गए। गर्मी को कौन कहे बारिश के दिनों में ही इन डैम में पानी ठहर नहीं पाता। वजह चेक डैम के दीवालें पानी रोकने लायक नहीं हैं। इन दिनों वन्य जीव बिहार में हजारों की तादात में वन्य जीव के अलावा पशु पक्षी निवास करते हैं। प्रचंड गर्मी के चलते इनके समक्ष भोजन के साथ ही पानी की सख्त किल्लत आड़े आ रही है। परिणाम स्वरूप वन्य जीवों का आबादी की ओर रूख हो रहा है। ¨हषक वन्य जीव बस्तियों में प्रवेश कर प्यास व भूख मिटाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। वन्य जीव बिहार में नील गाय, लकड़बग्धा, हीरण, तेंदुआ, भालू, , खरगोस, सियार, लंगूर, बंदर सहित विभिन्न प्रजाति के पक्षी हैं। इनसेट--

गर्मी के दिनों में चेक डैम के पानी पूरी तरह से सूख जाते हैं। इसमें गर्मी के सीजन में पानी को संरक्षित रखने का कोई जरिया नहीं हैं। पशु पक्षी व जीव जंतुओं के लिए नदी व बांध की तलहटी में पानी है।

रविशंकर शुक्ला, वन क्षेत्राधिकारी

Posted By: Jagran

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