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    रहस्य और रोमांच जगाता है शिकारपुर का 'बारहखंभा'

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 26 Sep 2019 11:22 PM (IST)

    पुरातत्व विभाग में दर्ज करीब 700 वर्ष पुराने बसे नगर शिकारपुर का अपना इतिहास है। लोगों के दिलों में रहस्य और रोमांच जगाने के लिए अभी भी बारहखंभा इमारत पर्यटन का केंद्र बनी हुई है।

    रहस्य और रोमांच जगाता है शिकारपुर का 'बारहखंभा'

    बुलंदशहर, जेएनएन : पुरातत्व विभाग में दर्ज करीब 700 वर्ष पुराने बसे नगर शिकारपुर का अपना इतिहास है। लोगों के दिलों में रहस्य और रोमांच जगाने के लिए अभी भी 'बारहखंभा' इमारत पर्यटन का केंद्र बनी हुई है। कुछ सुलझी और कुछ अनसुलझी कहानियां में समाई इस इमारत के निर्माण को लेकर तमाम तर्क हैं। रहस्य की चादर ओढ़े सदियों से खड़ी इस इमारत को देखने के लिए देशभर से पर्यटक हर मौसम में यहां पहुंचते हैं।

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    जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी. की दूर पर बसा है शिकारपुर। कस्बे में मेरठ-बदायूं स्टेट हाईवे से मात्र चंद कदमों की दूरी पर स्थित बारहखंभा की इमारत है। इमारत के निर्माण को लेकर तमाम किस्से-कहानियां स्थानीय लोगों को कंठस्थ हैं। कुछ लोगों जहां इसे दूसरी दुनिया से आए जिन्न द्वारा निर्माण कराए जाने का दावा करते हैं तो कुछ लोग इसे सिकंदर लोधी के धर्मगुरु सैयद अब्दुल्ला कुतुब बुखारी की इबादत स्थली बताते हैं। इसके अलावा अन्य किवदंतियां भी इस इमारत को लेकर हैं। बारहखंभा इमारत का कुछ ग्रामीण अंचल के बनाए गए नाटकों में भी जिक्र है। मोहर्रम के अवसर पर बारहखंबा को देखने के लिए दिल्ली एवं दूर-दराज से सैयद बिरादरी के लोग काफी संख्या में आते हैं।

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    अधूरा रह गया निर्माण

    सदियों पुरानी इस इमारत में कुल 16 खंबे एवं 12 खन यानी दरवाजे हैं। जिसकी खासियत है कि हर तरफ से देखने पर 12 दरवाजे ही नजर आते हैं। सैंकड़ों साल पहले निर्माण होने से लेकर आज तक कई बार भयंकर आंधी तूफान आए, लेकिन बिना छत खड़े इन खंभों को नहीं हिला सके। ऐसा नहीं है कि इमारत को पूरा करने का प्रयास नहीं किया गया, लेकिन तमाम कारणों और हादसों के चलते कभी इमारत की छत पूरी नहीं हो पाई।

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    पर्यटन स्थल का मिले दर्जा

    स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले काफी समय से बारहखंभा इमारत को पर्यटन स्थल घोषित कराने की मांग सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से की जाती रही है। पूर्व विधायक बासूदेव बाबा ने इस संबंध में प्रयास भी किए, लेकिन प्रयास अधूरा ही रहा। उधर, हर वर्ष इस रहस्यमयी इमारत को देखने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस इमारत को पर्यटन स्थल घोषित कर इसका विकास कराए।