बुलंदशहर के किसान संजीव की अनूठी पहल: प्राकृतिक खेती से बढ़ा रहे आय, दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित
बुलंदशहर के किसान संजीव शर्मा सुभाष पालेकर मॉडल की प्राकृतिक खेती अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि ...और पढ़ें

गन्ने के खेत में बैगन, हल्दी व मिर्च की खेती की जानकारी देते संजीव। सौ जागरण
HighLights
संजीव शर्मा ने प्राकृतिक खेती को बनाया अतिरिक्त आय का माध्यम।
स्वयं निर्मित कृषि यंत्रों से लागत और समय की बचत।
आलू की पराली पर खेती जैसी अनूठी विधियों का प्रयोग।
जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। अधिक उत्पादन की अंधी दौड़ में जहां किसान रासायनिक उर्वरक व पेस्टिसाइड का अंधाधुंध प्रयोग करने से नहीं हिचक रहा है ऐसे में संजीव शर्मा सुभाष पालेकर मॉडल की प्राकृतिक खेती अपनाकर उत्तम खेती और स्वस्थ भूमि की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं।
प्राकृतिक खेती के ध्वजवाहक बने संजीव शर्मा
बीबी नगर क्षेत्र के गांव निसुर्खा निवासी संजीव शर्मा प्राकृतिक खेती के ध्वजवाहक बन स्वयं तो पालेकर मॉडल अपना ही रहे हैं अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रशिक्षण देकर प्रेरित कर रहे हैं। आईटीआई में फिटर का डिप्लोमा धारक संजीव शर्मा ने कुछ कृषि यंत्र भी स्वयं निर्मित किए हैं जिनसे समय और लागत की बचत होती है।
संजीव शर्मा ने धान रोपाई के लिए मार्कर, बीज बुआई मशीन जिससे मोटे व बारीक दोनों प्रकार की बुआई की जाती है, पौधा गन जिससे पौध रोपी जाती है, बीज गन जिससे निराई गुड़ाई की जाती है, गुड़ के सांचे व कढ़ाव आदि यंत्र स्वयं बनाए हैं।
गुड़ के कढ़ाव में वह धुली उडद की दाल का आटा व गन्ने के रस का लेप लगाकर सुखाते हैं उसके बाद अरंडी का तैल लगाकर सिकाई करते हैं जिससे एक सत्र के लिए फ़ूड ग्रेड का बर्तन तैयार हो जाता है। उसी कढ़ाव में वह सदा, हल्दी, सहजन व अश्वगंघ गुड़ तैयार करते हैं। स्वयं निर्मित ड्रायर में हल्दी व सेंहजन की पत्तियां सुखाते हैं।

संजीव शर्मा की खेती के चार प्रमुख बिंदु
- अनूठी सिंचाई व्यवस्था: संजीव शर्मा मिश्रित खेती में एक गूल छोड़कर सिंचाई करते हैं। खाली बची गूल में फसल से निकले खरपतवार, घासफूस व फसल अवशेष से आच्छादित कर देते है जिससे नामी बरकरार रहती है और पानी की बचत होती है।
- स्वास्थ्य वर्धक शाक वाटिका: शाक वाटिका में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत बेड बनाकर मटर, बाकला, मूली, शलजम,गोभी, चना, सहजन, खट्टा व देशी पालक व सोया शाक आदि की मिश्रित खेती की है।
- आलू की अनूठी खेती: संजीव शर्मा ने आलू की खेती के लिए अनूठी पहल की है। वह आलू की खेती जमीन के अंदर नहीं बल्कि मिट्टी के ऊपर पराली के नीचे करते हैं। इससे जमीन की जुताई का खर्च बचता है और पराली का प्राकृतिक निस्तारण होता है। आलू आजू बाजू व बीच में बाकला तदोपरांत ऊपर तीन इंच धन की पराली डाली जाती है। फसल तैयार होने के उपरांत बेल वाली फसलें बोकर अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
- देशी बीजों का संग्रह: संजीव के खजाने में गेहूं की बंशी, सोना मोती पैगम्बरी, चावल गांठा व खपली तथा धान की लालमणि, काला नमक, रामभोग, तिलक चंदन के अलावा मिलेट्स में रागी, सांवा, पीली व लाल कंगनी तथा चैन सहित पेड़ पर लगने वाली सेम की फली तलवार बीन्स उपलब्ध है।
गुरु जी से मिली खेती की प्रेरणा
संजीव शर्मा बताते हैं कि उन्हें प्राकृतिक खेती की प्रेरणा उनके गुरु जी रामकिशन गुप्ता से मिली। उन्होंने संजीव से बिना रासायनिक उर्वरक व पेस्टिसाइड का गेंहू उगाने को कहा ताकि स्वयं और भूमि की सेहत अच्छी रही। तभी उन्होंने वर्ष 2012 से दो वर्ष तक जैविक खेती की, लेकिन ऐच्छिक परिणाम नहीं मिलने पर उन्होंने सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को अपनाया।

अन्य किसानों को प्रशिक्षण देकर करते हैं प्रेरित
संजीव शर्मा तीन दिवसीय कैम्प आयोजित कर किसानों को रात में थ्योरी व दिन में प्रक्टिकल के माध्यम से सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देते हुए प्रेरित करते हैं ताकि आय के अतिरिक्त स्वस्थ भूमि व स्वस्थ जीवन की परिकल्पना साकार हो सके।
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