जेएनएन, बुलंदशहर :

राधेय की मौत पर बिफरे किन्नर समाज ने शव सौंपने की मांग की है। रंजना अग्रवाल के साथ आए दर्जनों किन्नरों ने चेतावनी दी है कि यदि रंजना को राधेय का शव नहीं मिलेगा तो सोमवार को प्रदेश भर के किन्नर कलक्ट्रेट पर धरना देंगे। फूट-फूटकर रोई रंजना अग्रवाल का कहना है कि देश का पहला किन्नर आश्रम बनाने का बीड़ा क्या उठाया, जिला प्रशासन मदद करने के बजाए उनका उत्पीड़न कर रहा है। उन्होंने मथुरा के लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद से तीन माह के बच्चे को लाकर महिला कल्याण समिति की प्रदेश अध्यक्ष व किन्नर आश्रम की संस्थापिका रंजना अग्रवाल ने पालन पोषण शुरू किया। इस बच्चे को थर्ड जेंडर बताया गया और जगह-जगह स्वागत किया गया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने मामले का संज्ञान लिया और बच्ची राधेय को कानूनी प्रक्रिया के बाद मथुरा स्थित राजकीय बाल शिशु गृह में भिजवा दिया गया। बुधवार की सुबह दो बजे राधेय की मौत हो गई। मौत की सूचना पर दर्जनों किन्नरों के साथ कलक्ट्रेट पहुंची रंजना अग्रवाल ने राधेय का शव दिलाने की मांग की। पूर्व विधायक गुड्डू पंडित और रंजना अग्रवाल जिलाधिकारी रविद्र कुमार से मिले। डीएम ने टीम गठित कर मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया नियमानुसार कराने की बात कही है।

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किन्नर समाज में उबाल

जनपद के किन्नर राधेय को समाज का हिस्सा मान चुके हैं। उनका कहना है कि राधेय का अंतिम संस्कार समाज की देखरेख में हो। राधेय का शव किन्नर आश्रम की संस्थापिका अथवा उन्हें सौंपा जाए। किन्नर गंगा महारानी, लक्ष्मी और सानू ने बताया कि आगामी तीन दिन तक किन्नर समाज का सम्मेलन है। चेतावनी दी कि यदि राधेय का शव जिला प्रशासन ने उन्हें नहीं सौंपा तो सोमवार को प्रदेशभर के किन्नर जनपद कलक्ट्रेट में होंगे।

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कानूनी दांव पेंच में फंस सकती है रंजना

सीडब्ल्यूसी ने कानूनी प्रक्रिया के अनुसार राधेय को मथुरा स्थित राजकीय बाल शिशु गृह में भेजा था। रंजना अग्रवाल को सीडब्ल्यूसी ने चार अगस्त और फिर 12 अगस्त को नोटिस भेजकर बच्ची राधेय की बाबत संबंधी दस्तावेज दिखाने और अपना पक्ष रखने की बात कही गई थी। इसके बावजूद रंजना अग्रवाल सीडब्ल्यूसी नहीं पहुंची। कानूनी दांवपेंच के अनुसार किसी बच्चे को गोद लेने की एक प्रक्रिया होती है जिसे पूर्ण नहीं किया गया। रंजना ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद थाने तक को भी सूचना नहीं दी और गैर राज्य से बच्चे को लेकर जनपद में आ गई।

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थर्ड जेंडर पर भी सवाल

रंजना अग्रवाल द्वारा राधेय को थर्ड जेंडर बताया जा रहा था। जबकि सीडब्ल्यूसी ने राधेय को रंजना से लेकर चाइल्डलाइन भेजा और मेडिकल कराया। इस रिपोर्ट में राधेय सामान्य बच्चा है, थर्ड जेंडर की बाबत कोई जानकारी नहीं दी गई है।

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इन्होंने कहा..

तीन माह की बच्चे की मौत दुखद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मौत की सच्चाई का पता चलेगा। जांच टीम गठित कर दी गई है दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही खुलासा होगा कि बच्चा थर्ड जेंडर है अथवा सामान्य। किसी भी समाज की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी।

-अभिषेक पांडेय, सीडीओ।

Edited By: Jagran