यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 06, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Nagina Chunav 2024 Result: पांच साल से जीत हासिल करने में जुटी भाजपा को भीतरघात ने मारा, दिग्गज नेताओं ने की चुनावी सभाएं
साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिजनौर और नगीना सीट पर भाजपा को पराजय का सामना करना ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, बिजनौर। नगीना सीट पर ‘कैसे जीत हो’ को पूरी ताक झोंकने वाली भाजपा को लाेकसभा चुनाव में भीतरघात ने हार का सामना करना पड़ा, जबकि इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए कई केंद्रीय मंत्री, यूपी के मुख्यमंत्री समेत कई अन्य दिग्गजाें ने रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
साल 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिजनौर और नगीना सीट पर भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा था। साल 2024 होने वाले लाेकसभा चुनाव में प्रत्येक दशा में इन दोनों सीटों पर जीत हासिल करने के लिए हाईकमान ने केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्ण्व समेत तीन मंत्रियों ने जिले में जगह-जगह बैठकें की और बूथ लेबल पर बैठे कार्यकर्ताओं को मनाने का काम किया।
भाजपा के दिग्गज नेताओं ने की थी जनसभाएं
चुनाव के दौरान इस सीट पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ और प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई दिग्गजों ने चुनावी रणनीति के सार्वजनिक मंचाें पर कार्यकर्ता से मतदाताओं काे जागरूक करने और मतदान के दौरान बूथोंं तक लाए जाने का आह्वान भी किया, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। 19 मई को मतदान के दिन मतदाता अपने घरों से बाहर नहीं निकले और न उन्हे भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें घरों से निकालने का कोई प्रयास नहीं किया।
यही कारण है कि नगीना संसदीय सीट में नजीबाबाद, नगीना, नहटौर, धामपुर और नूरपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। अकेले धामपुर में भाजपा के जिलाध्यक्ष, विधायक समेत कई वरिष्ठ नेता रहते है, जबकि नहटौर विधानसभा क्षेत्र में स्वयं विधायक नहटौर ओम कुमार का गांव है।
भीरतघात की वजह से भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा
भीतरघात की वजह से इन दोनाें विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। यही स्थिति नजीबाबाद, नगीना और नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में भी रही। इन तीनाें सीटों पर भाजपा पराजित रही। बताते है कि चुनाव प्रचार के दौरान लाेगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से दूरी बनाए रखी। वहीं नेता भी आम जनता का विश्वास नहीं जीत पाए।
