थाना परिसर में निकला कोबरा, पुलिसकर्मियों में मच गई खलबली; मौके पर पहुंची बिजनौर के वन विभाग की टीम
बिजनौर के शिवालाकलां थाना परिसर में अचानक एक कोबरा सांप दिखने से हड़कंप मच गया। पुलिस की सूचना पर वन ...और पढ़ें

बिजनौर के शिवालाकलां थाना परिसर में कोबरा दिखने से खलबली।
HighLights
शिवालाकलां थाना परिसर में कोबरा देखा गया।
पुलिस ने वन विभाग को सूचना दी।
संवाद सूत्र, शिवालाकलां (बिजनौर)। शिवालाकलां थाना परिसर में अचानक कोबरा देखे जाने से खलबली मच गई। पुलिस की सूचना पर वन विभाग की टीम वहां पहुंची और उसका रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया।
थाना परिसर के पीछे आम का बाग व गन्ने का खेत है। वहीं, थाने के पिछले हिस्से में शौचालय बना है। गुरुवार देर शाम सिपाही शौचालय की ओर पहुंचे तो उनकी नजर वहां बैठे कोबरा सांप पर पड़ी। जिसे देख उनके होश उड़ गए।
शोर मचाने पर थाना प्रभारी त्रिवेन्द्र सिंह व अन्य स्टाफ वहां पहुंच गया। इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन दारोगा मुकुल त्यागी और सुमित कुमार अपनी रेस्क्यू टीम के साथ पहुंचे। बाद में उसे सुरक्षित पकड़ कर जंगल में छुड़वा दिया गया।
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बेकाबू है गुलदारों का कुनबा, नसबंदी के अलावा विभाग पर नहीं विकल्प
बिजनौर: जिले में गुलदारों का कुनबा लगातार बेकाबू होता जा रहा है। हर गांव के खेतों में गुलदारों का कब्जा है।गुलदारों के कुनबे को काबू में रखने के लिए वन विभाग शासन को लगभग 650 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेज है। गुलदारों की नसबंदी और वन की सोलर फेंसिंग के लिए बजट मांगा गया है।
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शुरूआत में गुलदार अमानगढ़ के आसपास के गांवों में ही दिखाई देता था। बाद में गुलदार पूरे जिले में फैल गया। खेतों में गुलदारों को बाघ के हमलों का भी डर नहीं था। उनके बच्चे भी वनों के मुकाबले अधिक जिंदा बचे। खेतों में गुलदारों का कुनबा बढ़ता चला गया। अब हालात ये हो गए हैं कि जिले में कोई ऐसा गांव नहीं है जहां पर गुलदार न हो। इस बार लगभग 70 गुलदार पकड़े जा चुके हैं लेकिन लगता नहीं है कि खेतों में गुलदार कम हुए हैं। उनके कुनबे को कम करने के लिए वन विभाग ने शासन को उनकी नसबंदी कराने का प्रस्ताव भेजा है।
साथ ही जिले में गुलदारों को वनों के अंदर ही रोकने के लिए सोलर फेंसिंग कराने का प्रस्ताव भेजा गया। ये सोलर फेंसिंग भी 500 किलोमीटर से अधिक लंबी होगी। अभी खेतों में पकड़े जा रहे गुलदारों को दूसरे जिलों के चिड़ियाघर में भेजा जा रहा है। खेतों में पकड़े गए गुलदारों की नसबंदी करके सोलर फेंसिंग से आच्छादित वनों में छोड़ा जाएगा। इससे वनों के अंदर भी उनकी आबादी बेकाबू नहीं होगी और शिकार की भी कमी नहीं रहेगी।
डीएफओ जय सिंह कुशवाहा का कहना है कि गुलदारों की नसबंदी और वनों की सोलर फेंसिंग से जुुड़ा प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। खेतों में पिंजरे लगाकर गुलदारों को पकड़ने का काम भी लगातार किया जा रहा है।
