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'गोबर क्राफ्ट' से चमकी किस्मत: मूर्तियां, दीपक और सजावटी सामान बनाकर नीलम बनीं महिलाओं की रोल मॉडल, कई को मिला रोजगार

By Rahul Shyam Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 03 Nov 2026 05:55 PM (IST)

Bijnor News: बिजनौर की नीलम ने गोबर से मूर्तियां, दीपक और सजावटी सामान बनाकर अपनी पहचान बनाई है। उनके 'गणेश ...और पढ़ें

बिजनौर के गांव शाकमपुर गिलाड़ी में दीपक व सजावटी सामान बनातीं नीलम (बाएं)। जागरण

बिजनौर के गांव शाकमपुर गिलाड़ी में दीपक व सजावटी सामान बनातीं नीलम (बाएं)। जागरण

HighLights

  1. पारंपरिक सामग्री के उपयोग से पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद कर रहीं तैयार।

  2. बिजनौर में 'गणेश स्वयं सहायता समूह' से महिलाएं बन नहीं आत्मनिर्भर।

संवाद सूत्र, नहटौर (बिजनौर)। नारी के दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास के सामने हर चुनौती छोटी साबित होती है। समाज में ऐसी कई महिलाएं हैं, जो न केवल अपने जीवन को बेहतर बना रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

ऐसा ही उदाहरण नहटौर की ग्राम पंचायत शाकमपुर गिलाड़ी निवासी नीलम का है। जिन्होंने गोबर से बनी मूर्तियां, दीपक और सजावटी सामान बनाकर आज अपनी पहचान बनाई है।

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नीलम बताती हैं कि उन्होंने कोरोना काल में 16 सितंबर 2020 गणेश स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया था। उन्होंने गोबर से मूर्तियां, दीपावली के दीपक बनाने का छोटा सा काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके इस प्रयास से गांव और आसपास के क्षेत्रों की 11 महिलाएं भी जुड़ गईं। इनमें मानकपुर, फुलसंदा, खाकम, महमूदपुर और मिलक आदि गांवों की महिलाएं शामिल हैं।

आज सभी महिलाएं मिलकर बड़े स्तर पर कार्य कर रही हैं। वह भगवान की मूर्तियां व दीपक के अलावा सजावटी घरेलू सामान भी बनाने लगीं हैं। इससे उन्हें 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय हो रही है। साथ ही उनसे प्रेरित होकर अन्य महिलाएं भी इस रोजगार से जुड़ रही हैं।

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गोबर से ऐसे बनता है सामान

नीलम ने बताया कि गोबर से उत्पाद तैयार करने के लिए 600 ग्राम सूखे और महीन गोबर में 300 ग्राम ग्वार गम पाउडर मिलाकर पेस्ट तैयार किया जाता है। पेस्ट को विभिन्न सांचों में डालकर देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीपक और सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं। पारंपरिक सामग्री को उपयोग में लाकर महिलाएं पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद तैयार कर रही हैं।

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बताया कि दीपावली पर दीपक व सामान की मांग बहुत बढ़ जाती है। आसपास के गांव व नहटौर के अलावा आन लाइन माध्यम से बिक्री करती हैं। बिक्री के लिए जिला मुख्यालय पर विकास भवन, ब्लाक मुख्यालय पर लगने वाले समूह के मेलों में स्टाल भी लगाती हैं।

भविष्य में समूह की महिलाएं गोबर से जैविक खाद तैयार कर जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना बना रही हैं। उनका यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन रहा है।

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