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डिजाइनर ज्वेलरी अब आपके बजट में, CСSU के स्टूडेंट्स की क्रिएटिविटी का कमाल हैं ये आभूषण; खरीदारी के मौके का उठाएं लाभ

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 03 Nov 2026 03:56 PM (IST)

Chaudhary Charan Singh University: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में छात्रों द्वारा तैयार की गई डिजाइनर और कास्ट्यूम ज्वेलरी की ...और पढ़ें

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलाजी विभाग में कास्ट्यूम ज्वेलरी प्रदर्शनी।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलाजी विभाग में कास्ट्यूम ज्वेलरी प्रदर्शनी।

HighLights

  1. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलाजी विभाग में कास्ट्यूम ज्वेलरी प्रदर्शनी शुरू।

  2. बी.वोक ज्वेलरी डिजाइनिंग के विद्यार्थियों ने पेपर, फैब्रिक, वायर, बीड्स और स्टोन से तैयार किए आकर्षक आभूषण।

  3. 1000 से अधिक डिजाइनर आभूषण 300-1200 रुपये में उपलब्ध, विद्यार्थियों की रचनात्मकता देखने को मिल रही।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सोने-चांदी के आभूषणों की चमक से अलग अब फैशन की दुनिया में डिजाइनर और कास्ट्यूम ज्वेलरी का आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। इसी हुनर, रचनात्मकता और तकनीकी कौशल को मंच देने के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलाजी विभाग में मंगलवार से दो दिवसीय कास्ट्यूम ज्वेलरी प्रदर्शनी एवं बिक्री शुरू हुई।

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तीन और चार नवंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में करीब 1000 तरह के आभूषणों और डिजाइन का प्रदर्शन किया जा रहा है। खास बात यह है कि इन आभूषणों को विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने खुद तैयार किया है।

प्रदर्शनी में बी.वोक इन ज्वेलरी डिजाइनिंग के पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों की रचनात्मकता देखने को मिल रही है। विद्यार्थियों ने पारंपरिक आभूषणों से लेकर आधुनिक फैशन के अनुरूप आकर्षक डिजाइन तैयार किए हैं। इनमें पेपर बीड्स, फैब्रिक, वायर, ब्रास, रंग-बिरंगे मोतियों और विभिन्न प्रकार के स्टोन का इस्तेमाल किया गया है। प्रदर्शनी में झुमके, नेकलेस, चोकर, कड़ा, नथ, बोरला सहित कई तरह के आभूषण आकर्षण का केंद्र हैं। खास बात यह है कि इन सभी डिजाइनों को तैयार करने में विद्यार्थियों को करीब दो से तीन महीने का समय लगा।

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डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक की मिल रही ट्रेनिंग

विभाग की ज्वेलरी डिजाइनिंग फैकल्टी अर्चना चौधरी ने बताया कि विद्यार्थियों को केवल आभूषण बनाना ही नहीं, बल्कि डिजाइन तैयार करने से लेकर उसके व्यावसायिक निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया सिखाई जाती है। पाठ्यक्रम में मैन्युअल डिजाइनिंग, कंप्यूटर एडेड डिजाइनिंग (सीएडी), जेमस्टोन की पहचान, डायमंड टेस्टिंग और ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं।

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सीएडी यानी कंप्यूटर एडेड डिजाइन के तहत विद्यार्थी अपने हाथ से तैयार किए गए डिजाइन को 3डी साफ्टवेयर पर विकसित करना सीखते हैं। इसके बाद डिजाइन को मशीन के माध्यम से वैक्स प्रोटोटाइप में बदला जाता है और फिर कास्टिंग की प्रक्रिया से आभूषण का निर्माण किया जाता है। इससे विद्यार्थियों को पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक ज्वेलरी उद्योग की तकनीकों का भी व्यावहारिक ज्ञान मिलता है।

300 से 1200 रुपये तक में खरीदारी का मौका

यह प्रदर्शनी केवल विद्यार्थियों के हुनर को प्रदर्शित करने का मंच नहीं है, बल्कि इसे बिक्री से भी जोड़ा गया है। यहां करीब 300 से 1200 रुपये तक की कीमत वाले आभूषण उपलब्ध हैं। विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह सिखाना भी है कि अपने उत्पाद को किस तरह प्रदर्शित करना है, उसकी कीमत तय करनी है और ग्राहकों के सामने उसकी विशेषताएं बताकर बिक्री करनी है। पांचवें सेमेस्टर में इस तरह की प्रदर्शनी आयोजित करने के पीछे छठे सेमेस्टर से पहले विद्यार्थियों को बाजार और व्यावसायिक गतिविधियों का अनुभव देना भी है।

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जयपुर के कारीगरों से लेकर ज्वेलरी इंडस्ट्री तक जुड़ाव

अर्चना चौधरी के अनुसार विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए कार्यशालाएं और इंडस्ट्री विजिट भी कराई जाती हैं। जयपुर में कुंदन ज्वेलरी के विशेषज्ञ कारीगर डा. दीपक संकेत के माध्यम से विद्यार्थियों को पारंपरिक आभूषण निर्माण की बारीकियां समझने का अवसर मिलता है। इसके अलावा कास्टिंग और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भ्रमण कराकर आभूषण तैयार होने की पूरी प्रक्रिया दिखाई जाती है।

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विभाग में असली जेमस्टोन के माध्यम से उनकी पहचान, क्लैरिटी और गुणवत्ता समझाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। डायमंड और जेमस्टोन टेस्टिंग की सुविधा फिलहाल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए है। इसे बाहरी लोगों के लिए परीक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। मेरठ के ज्वेलर्स से भी विभाग संपर्क बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहा है।

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रोजगार और स्वरोजगार के खुलेंगे नए रास्ते

विभाग का मानना है कि ज्वेलरी डिजाइनिंग केवल फाइन आर्ट का हिस्सा नहीं, बल्कि एक अलग तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्र है। इसमें रचनात्मकता के साथ रत्नों की गुणवत्ता, डिजाइनिंग तकनीक और निर्माण प्रक्रिया का ज्ञान जरूरी है। विद्यार्थी भविष्य में अपना व्यवसाय शुरू करने के साथ ज्वेलरी डिजाइनर, जेमस्टोन विशेषज्ञ और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी करियर बना सकते हैं।

विभाग के अनुसार इस प्रदर्शनी का एक उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में ज्वेलरी डिजाइनिंग के पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान दिलाना भी है। दो दिनों तक सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में सभी के लिए प्रवेश खुला है।

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