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बिजनौर की चीनी मिलें सात साल बाद केवल चीनी उत्पादन पर देंगी जोर, बाजार चढ़े रहने का अनुमान

Published: Fri, 09 Oct 2026 07:51 PM (IST)

बिजनौर की चीनी मिलें सात साल बाद केवल सी-हैवी शीरे से चीनी का उत्पादन करेंगी, क्योंकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की कम पैदावार से चीनी के दाम बढ़े हैं।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. सात साल बाद बिजनौर की मिलें केवल चीनी बनाएंगी।

  2. महाराष्ट्र-कर्नाटक में गन्ने की कम पैदावार से चीनी महंगी।

  3. मिलें एथनॉल के बजाय सी-हैवी शीरे से चीनी पर ध्यान।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार गन्ने की पैदावार कम बताई जा रही है। इन राज्यों में गन्ने की कम पैदावार से आने वाले समय में चीनी का उत्पादन गिरेगा और दाम बढ़ेगा। बाजार को कैश करने के लिए जिले की चीनी मिल सात वर्ष बाद केवल सी हैवी (एक प्रकार का शीरा) पर ही चलेंगी। बी हैवी शीरा या सीधे गन्ने के रस से एथनॉल नहीं बनाएंगी।

जिले में दस चीनी मिल गन्ना पेराई करती हैं। एक समय था, जब मिलों की आमदनी केवल चीनी के उत्पादन और बाजार भाव पर निर्भर थीं, लेकिन मिलों ने धीरे-धीरे आमदनी के जरिए बढ़ाए, बिजली बनाई। वर्ष 2018 के आसपास गन्ने की पैदावार बंपर हुई तो बी हैवी शीरा और बाद में गन्ने के रस से सीधा एथनॉल बनाया। विदेशी बाजार के लिए रॉ शुगर भी बनाई। मिलों में एथनॉल प्लांट लगे और अब सीबीजी प्लांट लगने जा रहे हैं।

चढ़ा ही रहेगा चीनी का बाजार

मिलों ने एथनॉल और रॉ शुगर से स्थानीय बाजार के लिए चीनी का उत्पादन कम किया, लेकिन अब फिर से पुरानी कहानी दोहराई जाने वाली है। कम उत्पादन से चीनी के दाम सवा चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं। दाम चढ़े हुए हैं।

इस बार देश के दूसरे राज्यों में बरसात कम होने पर गन्ने की पैदावार महाराष्ट्र में 20 और कर्नाटक में 30 प्रतिशत तक रहने की आशंका है। यानी चीनी का बाजार चढ़ा ही रहेगा। इसका लाभ लेने के लिए जिले की सभी मिल इस बार केवल चीनी के उत्पादन पर ही ध्यान देंगी।

रॉ शुगर, बी हैवी शीरा, गन्ने के रस एथनॉल बनाने का काम नहीं किया जाएगा। मिलें सी हैवी शीरे पर ही चलेंगी। धामपुर, स्योहारा, बरकातपुर, बुंदकी, चांगीपुर मिल बी हैवी बनाती हैं।

ये होता है बी हैवी व सी हैवी शीरा

गन्ने के रस से चीनी बनने की प्रक्रिया के बाद जो रस बचता है उसे सी हैवी शीरा कहते हैं। इसमें मिठास नहीं होती। सी हैवी शीरे में 15 प्रतिशत तक मिठास छोड़ी जाए तो उसे बी हैवी बोलते हैं। दोनों शीरे से एथनॉल बनता है लेकिन बी हैवी से चीनी कम बनती है और इसके दाम अधिक होते हैं। गन्ने के रस से सीधे भी एथनॉल बनाया जाता है।

इस बार मिल द्वारा केवल चीनी बनाई जाएगी। चीनी का बाजार अच्छा है। बाकी मिल भी केवल स्थानीय बाजार के लिए चीनी बनाने की बात कह रही हैं।

-नरपत सिंह, संयुक्त अध्यक्ष- बरकातपुर चीनी मिल

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