बिजनौर : रामपुर और देवबंद में शिक्षा पूरी कर जब मैं बिजनौर में लौटा तो यहां धार्मिक वैमनस्यता चरम पर थी। इसी का परिणाम रहा कि 1989-90 में यहां दंगा भड़क उठा। इस धार्मिक उन्माद में न जाने कितनी जानें चली गईं और कितने ही घर बर्बाद हो गए। यह वह दौर था, जब लोगों को सर्वधर्म एकता की ओर ले जाना सबसे ज्यादा आवश्यक था। धन का अभाव था, लेकिन इरादे बुलंद थे। छोटे स्तर से शुरुआत की और इसका परिणाम भी सामने आया। लोगों तक पहुंचकर उन्हें समझाया और सर्वधर्म एकता का पाठ पढ़ाया।

इन शब्दों के साथ मोहल्ला काजीपाड़ा निवासी मुफ्ती शमून कासमी कहते हैं कि हर किसी को इस बात पर विचार करना चाहिए कि हम देश और समाज के लिए क्या कर रहे हैं? जिसने इस पर गंभीरता से सोचकर आगे बढ़ने की ठानी उसका रास्ता कोई बाधा नहीं रोक सकती। मुफ्ती शमून बताते हैं कि धर्मानुयाइयों के बीच दंगे से उपजी खाई को पाटने के लिए उन्होंने सर्वधर्म एकता समिति के बैनर तले जिले भर में जनसभाएं एवं बैठकें कर लोगों को राष्ट्रीय एकता का पाठ पढ़ाया। इसके परिणाम सामने आए। इसके बाद सन् 2000 में पोलियो अभियान में सहयोग शुरू किया। पोलियो अभियान का विरोध देते हुए उन्होंने पहली बार जनपद में धर्मगुरुओं को बुलाकर इस अभियान को लेकर फैली भ्रांति को दूर किया और जनपद के 18 कस्बों में कार्यक्रमों का आयोजन कर पोलियो अभियान के प्रति पनप रहे विरोध को खत्म कराया। आज इसकी का परिणाम है कि जनपद में पोलियो अभियान का विरोध कोई नहीं करता। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए भी अभियान चलाया गया। बाद में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी। अन्ना आंदोलन के संस्थापक सदस्यों में वे शामिल रहे और दिल्ली में चले आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुफ्ती शमून कासमी कहते हैं कि हर किसी के जीवन में किसी ने किसी तरह का अभाव होता है। इसकी परवाह न करें। यह सोचें कि हम देश और समाज के लिए क्या कर सकते हैं। गणतंत्र का अर्थ जनता की सरकार है। इसलिए जब सरकार हमारी है तो इसे चलाना भी हमें ही है। गठित सरकारों को भूलकर अपनी जिम्मेदारी समझें और उसका निर्वहन करें।