308 पहियों वाले ट्रक से 58 पहिए निकले, अब 250 पहियों पर सफर जारी, बस्ती पहुंचने में दो महीने की देर
लखीमपुर खीरी में देश के पहले पीएलए बायोप्लास्टिक संयंत्र के लिए बेल्जियम से आया 200 टन वजनी वेसल दो महीने की देरी से बस्ती पहुंचा।

बस्ती के मनौरी चौराहे पर पहुंचा ट्रक।
HighLights
200 टन वजनी वेसल बस्ती पहुंचा, दो माह की देरी।
लखीमपुर खीरी में देश का पहला बायोप्लास्टिक संयंत्र।
250 पहियों पर चल रहा, रास्ते में बाधाएं हटाई गईं।
महेंद्र कुमार त्रिपाठी, बस्ती। लखीमपुर खीरी के कुंभी में स्थापित हो रहे देश के पहले पालीलैक्टिक एसिड (पीएलए) आधारित बायोप्लास्टिक निर्माण संयंत्र के लिए बेल्जियम से मंगाया गया 200 टन वजनी वेसल सोमवार को बस्ती पहुंच गया।
करीब 41 मीटर लंबे और 250 पहियों वाले ट्रेलर के मनौरी और पालिटेक्निक चौराहे पर पहुंचते ही उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। यह ट्रेलर पहले 308 पहियों वाला था, जिसमें कुछ पहिए कम किए गए हैं। लगभग 3,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए उपकरण करीब दो महीने की देरी से पहुंचा है। खराब सड़क, भारी बारिश और रास्ते में मौजूद अवरोधों ने इसके सफर को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
हटाए जा रहे बिजली के तार, खंभे, साइन बोर्ड
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के संयंत्र तक उपकरण पहुंचाने के लिए बस्ती से लखीमपुर खीरी तक विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। रास्ते में सड़क की चौड़ाई कम होने पर उसे दुरुस्त किया जा रहा है। बिजली के तार, खंभे, साइन बोर्ड और पेड़ हटाकर ट्रेलर के गुजरने का रास्ता बनाया जा रहा है। पुलिस, यातायात, विद्युत, वन और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की टीमें समन्वय के साथ काम कर रही हैं।
58 पहिये हटाए गए, रोजाना 200 लीटर डीजल खपत
करीब 41 मीटर लंबे, छह से सात मीटर चौड़े और सात से आठ मीटर ऊंचे उपकरण को विशेष क्षमता वाला जेएम बक्सी पुलर खींच रहा है। झारखंड तक ट्रेलर में 308 पहिये लगे थे, लेकिन मोड़ लेने में परेशानी के कारण 58 पहिये हटा दिए गए। अब यह 250 पहियों के सहारे पांच से आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। चालक के मुताबिक, प्रतिदिन करीब 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है।
चीनी और अपशिष्ट से बनेगा बायोप्लास्टिक
कुंभी में स्थापित हो रहे संयंत्र में चीनी और उससे जुड़े अपशिष्ट पदार्थों से पीएलए आधारित बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा। प्रक्रिया में शर्करा से लैक्टिक एसिड और फिर लैक्टाइड के जरिए पीएलए रेजिन बनाया जाएगा, जिससे विभिन्न प्लास्टिक उत्पाद तैयार होंगे। परियोजना से देश में पीएलए के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने और आयात पर निर्भरता घटने की उम्मीद है।
ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से रवाना हुआ यह उपकरण
झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा है। बस्ती से आगे इसे डुमरियागंज, उतरौला, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच के रास्ते लखीमपुर खीरी पहुंचाया जाएगा। प्रशासन के सामने अब इस विशालकाय उपकरण को बिना दुर्घटना के गंतव्य तक पहुंचाने की चुनौती है।
चार घंटे प्रभावित रहा यातायात
सोमवार सुबह करीब 10 बजे ट्रेलर पालिटेक्निक चौराहे पर पहुंचा। इसे आगे निकालने के लिए बिजली के तार हटाने पड़े और एक सूखा पेड़ काटना पड़ा। भारी वाहन की आवाजाही और रास्ता साफ कराने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक यातायात प्रभावित रहा। करीब 50 कर्मचारियों की टीम इस विशाल उपकरण को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने में जुटी है।
