बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर में रावण ने की थी शिवलिंग की स्थापना, सावन में लगता है भोले भक्तों का तांता
Baba Bhadeshwar Nath Shiv Temple History बस्ती जिले में स्थित बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में तो पूरे साल भक्तों के आने का सिलसिला जारी रहता है। लेकिन सावन में यहां भक्तों का रेला लगता है। 36 साल पहले शुरू हुई कांवड़ यात्री में करीब पांच लाख भोले भक्त शामिल होते हैं। आइए इस मंदिर के स्थापना की कहानी जानते हैं...

बस्ती, जागरण टीम। Baba Bhadeshwar Nath Shiv Temple: श्रावण मास में आस्था का केंद्र बाबा भदेश्वर नाथ शिव मंदिर अति प्राचीन मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि मंदिर के शिवलिंग की स्थापना रावण ने की थी। यहां पर अज्ञातवास के समय युधिष्ठिर ने पूजा की थी। वहीं, जब देश अंग्रेजों की गुलामी के जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब ब्रिटिश सेना मंदिर व उसके आसपास के क्षेत्रफल पर कब्जा करना चाहती थी, लेकिन दैवीय प्रकोप के चलते अंग्रेजों को पीछे हटना पड़ा।
ये है भद्रेश्वर नाथ मंदिर का इतिहास
बस्ती शहर से करीब सात किलोमीटर दूर कुआनो नदी के तट पर बाबा भदेश्वर नाथ का प्राचीन मंदिर स्थित है। वैसे तो यहां पूरे साल शिवभक्तों के जल चढ़ाने का क्रम चलता रहता है, लेकिन सोमवार और श्रावण मास में तो यहां बड़ी संख्या में दूर-दूर से शिवभक्त आते हैं। मंदिर का शिवलिंग इतना बड़ा है कि कोई भी भक्त अपने दोनों बांहों से घेर कर नहीं पकड़ सकता है।
युधिष्ठिर ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर की थी पूजा
मंदिर के एक पुजारी राकेश गिरी बताते हैं कि लोक मान्यताओं के अनुसार रावण हर रोज कैलाश जाकर भगवान शिव की पूजा करता था। वहां से एक शिवलिंग लेकर वापस लौटता था। उसी दौरान ये शिवलिंग भी रावण कैलाश से लेकर आया था। मान्यता यह भी है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान युधिष्ठिर ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। यह क्षेत्र वर्षों तक घने जंगलों से घिरा रहा।
36 साल पहले यहां नंदानाथ ने शुरू की थी कांवड़ यात्रा
अयोध्या से लेकर भदेश्वर नाथ मंदिर तक कांवड़ यात्रा की शुरूआत 36 वर्ष पहले अस्पताल चौराहा स्थित शिव मंदिर के महंत देश बंधु नंदानाथ ने की थी। पहली बार 1987 में पुरानी बस्ती क्षेत्र के कुछ श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल हुए थे। अयोध्या से जल भरकर कांवड़ यात्रियों ने भदेश्वर नाथ शिव मंदिर में जलाभिषेक किया था। तब से यह परंपरा चालू है। नंदानाथ ने बताया कि पहली बार कांवड़ यात्रा में महज 20 श्रद्धालु ही शामिल हुए थे, आज इसमें पांच लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं।
बताया कि दिन प्रतिदिन कांवड़ यात्रा को लेकर लोगों में श्रद्धा बढ़ती गई। जैसे जैसे लोगों की श्रद्धा बढ़ी, उनकी संख्या में भी बढती गई। आज बस्ती की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं की दृष्टि से ऐतिहासिक मानी जाती है। इसमें शामिल होने वालों की संख्या लाखो में पहुंच गई। बताया कि हिंदू धर्म में सरयू नदी का जल पवित्र माना जाता है, इस कारण बस्ती और आसपास के जिलों से श्रद्धालु यहां के जल भद्रेश्वरनाथ मंदिर में शिव का जलाभिषेक करते हैं।
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