बस्ती: पर्यटन मंत्रायल की टीम ने ऐतिहासिक अमोढ़ा और मखौड़ा धाम का बुधवार को सर्वे किया। टीम के सदस्यों ने स्थानीय लोगों के साथ अमोढ़ा में राजा जालिम ¨सह के ध्वस्त किले और मखौड़ा धाम में प्राचीन मंदिरों के अवशेष देखे। जगह के बारे में प्रचलित इतिहास और किवदंतियों की जानकारी ली।

बता दें कि लगभग छ माह पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने मखौड़ा को विकसित करने की बात कही थी। इसके अलावा अपने आदर्श ग्राम अमोढ़ा को भी ऐतिहासिक पहचान कायम करने का संकल्प दोहराया था। पिछले दिनों बस्ती आए केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश चन्द्र शर्मा ने भी श्रीराम सर्किट में मखौड़ा धाम को भी शामिल करने की घोषणा की थी। इसी क्रम में दिल्ली से वैभव प्रकाश, गोरखपुर से मनीष श्रीवास्तव व सिद्धार्थनगर से गणेश शंकर की टीम दिन में लगभग 11 बजे अमोढ़ा पहुंची। जहां राजा रहे जालिम ¨सह के ध्वस्त किले को भी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के संबंध में सर्वे किया गया। यहां से निकलने के बाद टीम मखौड़ा पहुंची। टीम का नेतृत्व कर रहे पर्यटन मंत्रालय के वैभव प्रकाश ने बताया कि सांसद हरीश द्विवेदी के पहल पर पर्यटन मंत्रालय के निर्देश के क्रम में इन दोनों स्थलों का जायजा लेने आए हैं। स्थानीय लोगों से बातचीत की गई है। संकलित तथ्यों की रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाएगी।

श्रद्धालुओं से ली जानकारी

विक्रमजोत हर्रैया,बस्ती: बुधवार को पर्यटन मंत्रालय की टीम जब मखौड़ा पहुंची तो कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मनवर तट पर श्रद्धालुओं द्वारा स्नान किया जा रहा था। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अलग-अलग जानकारी एकत्र की। साथ ही मखौड़ा के ऐतिहासिकता का भी पता लगाया।

बोले सांसद

सांसद हरीश द्विवेदी कहते हैं कि मखौड़ा व अमोढ़ा का विकास ही हर्रैया के विकास की इबारत लिखेगा। क्योंकि एक राम से जुड़ा स्थल है तो दूसरा देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी से। मेरा सपना था कि इन दोनों स्थलों को विकसित करने का है।

क्या है महत्ता

मखौड़ा वही तपोभूमि है जहां पर अयोध्या के नरेश दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया था। अमोढ़ा के राजा जालिम ¨सह व रानी तलाशि कुंवरि ने देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया था।