बिजली, कब आई, कब गई
बस्ती : बिजली की हालत किसी से छिपी नहीं है। कब आएगी और कब जाएगी? इसका निर्धारण कागजों में जरूर है म
बस्ती : बिजली की हालत किसी से छिपी नहीं है। कब आएगी और कब जाएगी? इसका निर्धारण कागजों में जरूर है मगर धरातल पर हालत बेहद दयनीय है। यहां कागज में 18 घंटे की शहर में तो गांव में 12 घंटे की आपूर्ति है, मगर वास्तविक स्थिति अलग है। शहर में 14 तो गांवों मे 8 घंटे तक की आपूर्ति से लोग परेशान हैं। दिन में कई-कई बार कटौती से पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है।
कटौती को लेकर चारों ओर हाय तौबा मची है। शहर में अचानक बिजली गुल होती है तो कब आएगी? इसका पता अधिकारियों को भी नहीं हो पाता। फिर तो गांव के क्या हालात होंगे? इसे बताने की जरूरत नहीं है। शहरी क्षेत्र में कहीं ट्रांसफार्मर दगा दे रहे हैं तो कहीं जर्जर तार विद्युत प्रवाह को कट जाने से बाधित कर देते हैं। यानी हालात कुछ और बयां करते हैं जबकि कागज कुछ और।
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-ग्रिड से कम वोल्ट की उपलब्धता से बढ़ा लो-वोल्टेज
शहर से लेकर गांवों तक की विद्युत व्यवस्था जहां गड़बड़ आपूर्ति के चलते दयनीय हो गई है, वहीं विभागीय जिम्मेदारों के अनुसार उत्पादन इकाई द्वारा कम वोल्ट की आपूर्ति से लो-वोल्टेज की समस्या पैदा हो गई है।
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-यह है शेड्यूल कटौती
- शहर में रोस्टिंग का शेड्यूल भोर में 4.30 से 7.30 बजे तक
- शाम 5.30 से 8.30 बजे तक
यानी हर दिन 6 घंटे की रोस्टिंग के अलावा आपात कालीन कटौती व लोकल फाल्ट भी आए दिन होते हैं।
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इनसेट
यह है आपूर्ति
तिथि शहर ग्रामीण
12 मई 19.30 11.20
13 मई 20.30 12.00
14 मई 21.00 11.00
15 मई 18.22 09.24
16 मई 22. 15 12.38
17 मई 18.00 11.0
18 मई 22.30 12.40
(आपूर्ति घंटों में )
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-क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक अभियंता टाउन राम शब्द कहते हैं कि विद्युत आपूर्ति चाक चौबंद है। लो वोल्टेज की समस्या है। उसका कारण ग्रिड से ही 32 हजार वोल्ट की आपूर्ति हो रही है, जबकि यहां के लिए 33 हजार वोल्ट की जरूरत होती है। कहा कि चूंकि तार, खंभे व ट्रांसफार्मर जर्जर हो चुके हैं। इनके बदलने की प्रक्रिया के तहत निविदा हो चुकी है, मगर तकनीकी कारणों के चलते कार्य बाधित है। लोकल फाल्ट व आपात कालीन रोस्टिंग के चलते जो कटौती हो रही है उसके अलावा उपभोक्ताओं को शत प्रतिशत बिजली दी जा रही है। गांव में दो शिफ्टों में 12 घंटे की आपूर्ति दी जा रही है।
उपभोक्ताओं की सुनें-
-आवास विकास कालोनी निवासी गृहणी ¨रकी गुप्ता कहती हैं कि विद्युत की हालत बेहद दयनीय है। रोस्टिंग व आपातकालीन कटौती की आड़ में इस गर्मी में विद्युत अनापूर्ति से हालत खराब हो जाती है। किचन में काम करना और भी मुश्किल होता है। सबसे ज्यादा तब स्थिति खराब होती है जब रात में सोने से पहले अचानक विद्युत कट जाती है,फिर तो घंटों करवट बदलते रात कटती है।
विद्यालय की संचालिका जयपुरवा निवासी विजय लक्ष्मी सिंह कहती हैं कि विद्युत विभाग पर किसी सरकार का अंकुश नहीं है। विभागीय जिम्मेदार तो जनरेटर व इनवर्टर में रहते हैं उन्हें दूसरों के दर्द से कोई लेना देना नहीं । किसी भी दिन 10 से 12 घंटे से अधिक बिजली नहीं रहती। कई-कई बार तो पूरी रात लोकल फाल्ट के चलते अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती है।
कटरा निवासी गृहणी रश्मि श्रीवास्तव की सुनें। कहती हैं कि अपने शहर में सर्वाधिक कटौती की जाती है। आखिर उन राजनेताओं के क्षेत्र में बिजली कहां से आ रही है जो ऊंची रसूख रखते हैं। विभाग कहता है कि उत्पादन और खपत में अंतर के चलते बिजली प्रभावित होती है फिर यह स्थिति आखिर उन नेताओं के क्षेत्र में क्यों नहीं पड़ती।
आवास विकास कालोनी निवासी प्रतिभा सिंह कहती हैं कि विद्युत को लेकर सर्वाधिक कष्ट रात में होता है। अचानक बिजली चली जाए और लोकल फाल्ट हो तो फिर रात अंधेरे में ही गुजारनी पड़ेगी, क्योंकि कोई सुनने वाला नहीं है। सुबह जरूरत पर लाइन बंद हो जाती है और जब तीखी धूप होती है तो भी कटौती का शेड्यूल शुरू हो जाता है। यह हाल आए दिन का है।
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