बस्ती: क्षेत्र के राजा जालिम सिंह के नगर अमोढ़ा में स्थित ऐतिहासिक रामरेखा मंदिर पर गुरुवार को भव्य मेले का आयोजन किया गया। जहां पर स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दराज से आए साधु-संतों ने रामरेखा नदी में श्रद्धा की डुबकी लगाकर दर्शन व पूजन किया। देर शाम तक मेले में काफी गहमा-गहमी रही तो पुलिस के जवान भी मेले की सुरक्षा में चौकस दिखे।

बता दें कि चैत्र मास की त्रयोदशी को प्रत्येक वर्ष ¨हदू धर्म की मान्यता के अनुसार वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अमोढ़ा के इस पौराणिक स्थल पर मेले का आयोजन होता है। किवदंतियां हैं कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम जब जनकपुरी से मां सीता का वरण कर पद मार्ग से इसी रास्ते से अयोध्या नगरी को लौट रहे थे तो उन्होंने नगर के इसी बड़े भू-भाग पर जहां जंगल व छायादार वृक्ष थे, विश्राम किया था। इसी दौरान जब मां सीता को प्यास लगी तो प्यास बुझाने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने तरकश से तीर निकाल कर एक रेखा खींची जिससे जल निकलने लगा और मां सीता समेत तमाम बारातियों ने अपनी प्यास बुझाई। तभी से पौराणिक कथाओं की मान्यता के अनुसार इस स्थल को रामरेखा के नाम से जाना जाने लगा। यह भी प्रचलित है कि उस स्थल पर बाद में अमोढ़ा के राजा जालिम सिंह ने भव्य मंदिर का निर्माण कराया था और तभी से इस स्थल को लोगों की आस्था से जोड़ने के लिए इस मेले का आयोजन किया जाता है।