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    बरेली में गीले कूड़े और गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 09 Jul 2021 07:26 PM (IST)

    बरेली, जेएनएन: उम्र मात्र 26 साल। किताबों से जानकारी ली और जैविक खाद बनानी शुरू कर दी। बड़ा बाइपास क

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    बरेली में गीले कूड़े और गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद

    बरेली, जेएनएन: उम्र मात्र 26 साल। किताबों से जानकारी ली और जैविक खाद बनानी शुरू कर दी। बड़ा बाइपास के निकट भोजीपुरा के गांव परधौली में प्लांट लगाकर गीले कूड़े और गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं प्रतीक बजाज। बड़ी मात्रा में खाद के उत्पादन के साथ ही देश भर में सप्लाई भी कर रहे हैं। नगर निगम गोबर और गीला कूड़ा उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहा है।

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    नगर निगम के लिए शहर से निकलने वाला कूड़ा और कान्हा उपवन से निकलने वाले गोबर का निस्तारण बड़ी समस्या है। अब तो नगर निगम ने घरों से गीला और सूखा कूड़ा अलग से उठवाना शुरू कर दिया है। सूखे कूड़े के निस्तारण के लिए नगर निगम ने मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर बनाए हैं। वही, गीला कूड़ा निस्तारण करने को कंपोस्टर लगाए हैं। कान्हा उपवन से निकलने वाले गोबर के निस्तारण को वहां एक कंपनी को खाद बनाने का जिम्मा दिया था, लेकिन वह प्लांट नहीं चल पा रहा है। नगर निगम की दोनों बड़ी समस्या का निदान परधौली निवासी प्रतीक बजाज ने शुरू किया है। वह गोबर और गीले कूड़े से जैविक खाद बना रहे हैं। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि गीले कूड़े व गोबर की खाद बनाकर अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा। इसके लिए जैविक खाद बनाने वाली संस्थाओं व लोगों से सहयोग लिया जा रहा है। निगम उन्हें गोबर और गीला कूड़ा उपलब्ध कराएगा।

    प्राइवेट संस्था से लिया जाएगा सहयोग

    पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि गोबर से जैविक खाद बनाने के लिए निगम प्राइवेट संस्था से सहयोग ले रहा है। उन्हें कान्हा उपवन से रोजाना छह से सात टन गोबर की सप्लाई हो रही है। जल्द निगम अपने स्तर से भी खाद बनाने का काम शुरू करेगा। फिर उसमें शहर का गीले कूड़े और गोबर को निस्तारित कर जैविक खाद तैयार की जाएगी।

    सौ गज में मात्र 30 हजार का करना होगा निवेश

    प्रतीक का प्लांट करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। इसमें वह करीब एक हजार टन जैविक खाद तैयार करते हैं। गोबर और गीले कूड़े से करीब 30 फीसद तक खाद निकल जाती है। फिर इस खाद की बिक्री वह देश के कई शहरों में कर रहे हैं। प्रतीक ने बताया कि कोई भी नया व्यक्ति सौ गज भूमि पर करीब 30 हजार निवेश कर खाद का उत्पादन कर सकता है।