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    देश की एकता और अखंडता के लिए मुसलमान पीएम नरेन्‍द्र मोदी के साथ काम करने को तैयार, बरेली में बोले मुस्लिम बुद्धिजीवी

    By Vivek BajpaiEdited By:
    Updated: Thu, 22 Sep 2022 01:53 AM (IST)

    Muslims with PM Narendra Modi उलेमा ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वाली राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। सियासी दलों को आगाह किया कि वे मुसलमानों को गुलाम ना समझें। उर्स के पहले दिन इस्लामिक रिसर्च सेंटर स्थित दरगाह आला हजरत में उलेमा की बैठक हुई।

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    Muslims with PM Narendra Modi: मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने पीएम नरेन्‍द्र मोदी के साथ काम करने की बात कही। जागरण आर्काइव

    बरेली, जागरण संवाददाता। Muslims with PM Narendra Modi:  दरगाह आला हजरत (Dargah Aala Hazrat) के तीन दिवसीय उर्स-ए-रजवी (Urs-e-Razvi) के मौके पर उलमा ने मुसलमानों के मुद्दों पर मुस्लिम एजेंडा (Muslim agenda) जारी किया, जिसमें देशभर के समाजिक, धार्मिक और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। इसमें मुस्लिम बुद्धिजीवियों (Muslim intellectuals) ने स्पष्ट कर दिया कि वे देश की एकता और अखंडता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ काम करने के लिए भी तैयार हैं। हुकूमतों को मुसलमानों से संवाद करने की अपील की, जिससे तमाम समस्याओं का हल निकाला जा सके।

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    उलेमा ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वाली राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। सियासी दलों को आगाह किया कि वे मुसलमानों को गुलाम ना समझें। उर्स के पहले दिन इस्लामिक रिसर्च सेंटर स्थित दरगाह आला हजरत में उलेमा की बैठक हुई। इसमें आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुस्लिम एजेंडा जारी करते हुए मुसलमानों को हिदायत दी कि वे शिक्षा, व्यापार और परिवार पर ध्यान दें। समाज में फैल रही बुराइयों की रोकथाम करें, अन्यथा भविष्य में बड़े नुकसान उठाने पड़ेंगे।

    उन्होंने मुस्लिम युवाओं को कानून के विरुद्ध कोई काम ना करने की सलाह दी। साथ ही आइएसआइएस, तालिबान, अलकायदा और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों की ओर से इंटरनेट मीडिया पर अपलोड किये जाने वाले वीडियो, आडियो और पाठ्य सामिग्री ना पढ़े और न देंखे। आपत्तिजनक पोस्ट भी साझा न करें। उलेमा ने मालदार मुसलमानों को गरीब और कमजोर बच्चों की स्कूल की फीस का खर्चा उठाने को कहा, जिससे कि वे पढ़ सकें। मदरसों और मस्जिदों में चलने वाले दीनी मकतबों में अरबी, उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी और कम्प्यूटर शिक्षा की व्यवस्था करें।

    जमीन जायदाद में लड़कियों को भी हिस्सा दिया जाए। जकात की सामूहिक व्यवस्था हो, जिससे उसके माध्यम से गरीब, यतीम और बेसहारा लोगों की मदद की जा सके। सरकार को हिदायत देते हुए कहा कि बेकसूर उलेमा और मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारियों पर रोक लगाई जाये, इससे मुसलमानों के दरमियान असुरक्षा की भावना फैल रही है। साथ ही विश्व में भारत की छवि धूमिल हो रही है। लव- जिहाद, माब-लिंचिंग, धर्मांतरण, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को भयभीत व परेशान किया जा रहा है, इस पर फौरी तौर से रोक लगे।

    कमजोर मुसलमानों की लड़कियों को डरा धमकाकर और लोभ लुभावने सपने दिखाकर कुछ संगठन शादी कराने की मुहिम चला रहे है, जिससे हिंदू मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द को खतरा बढ़ सकता है। मुसलमानों को आर्थिक आधार पर सरकारी नौकरियों में आरक्षण, सुन्नी सूफी बरेलवी मुसलमानों की सरकार में नुमाइंदगी और पैगंबरे इस्लाम बिल कानून लाने की मांग की।

    इस दौरान खलीफा मुफ्ती आजम हिंद सूफी अब्दुल रहमान कादरी, खानकाह अबुल उलाइया सूफी मोहम्मद हनीफ चिश्ती और हाजी नाजिम बेग नूरी, मौलाना मजहर इमाम पश्चिम बंगाल, मौलाना अब्दुस्सलाम कर्नाटक समेत विभिन्न प्रांतों के मौलाना मौजूद रहे।

    ज्ञानवापी से ताजमहल तक कई स्थलों के मुद्दे उठाए

    अयोध्या को छोड़कर बाकी के धार्मिक स्थल यथास्थिति में स्थिर रहेगें, इसमें किसी तरह का बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। इन स्थलों से संबंधित मामले कोर्ट में नहीं जाएंगे, मगर बनारस की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की ईदगाह मस्जिद, बदायूं की जामा मस्जिद, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद दिल्ली, ताज महल आगरा, कुतुब मीनार दिल्ली और ईदगाह कर्नाटक आदि के मुकदमे कोर्ट में विचाराधीन हैं, जिससे पूरे देश का महौल खराब हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस पर ध्यान देना चाहिए।