अब नहीं घटेगी चालान की जुर्माना राशि... मोटर यान अधिनियम में बदलाव के बाद वाहन स्वामियों की मुश्किलें बढ़ीं
मोटर यान अधिनियम में सरकार ने संशोधन के बाद अब बिना परमिट के वाहन चलाने पर न्यायालय जुर्माने को कम नहीं कर सकता। पहले वाहन स्वामी न्यायालय में याचिका दायर करके जुर्माना कम करा लेते थे। परिवहन विभाग ने सरकार से न्यायालयों में पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त करने की मांग की है। इस संशोधन से वाहन स्वामी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।

जागरण संवाददाता, बरेली। परिवहन विभाग ने चालान के नियमों में होने वाली कार्रवाई के प्रावधानों में बदलाव किया है। बिना परमिट के वाहन पकड़े जाने पर वाहन स्वामी याचिका कर न्यायालय से जुर्माना कम कराने में सफल हो जाते थे। अब केंद्र सरकार ने मोटर यान अधिनियम की धाराओं में संशोधन कर दिया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने सरकार से मांग की गई है कि न्यायालयों में पैरवी के लिए विभाग की ओर से अधिवक्ता की तैनाती की जाए।
मोटर यान अधिनियम के कुछ−कुछ प्रावधानों को एक साथ संशोधित किया गया है। जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से मोटर यान अधिनियम, 1988 में धारा 192ए, धारा 200 और 215 को संशोधन करने वाले प्रावधान को प्रभावी करने की अधिसूचना जनवरी में ही जारी हो चुकी है।
धारा 192ए में संशोधन के बाद अब धारा 66 (1) के अधीन परमिट के बिना या परमिट शर्तों के विरुद्ध संचालन के सापेक्ष वाहन स्वामियों के विरुद्ध दंड कठोर करते हुए न्यायालय द्वारा इस दंड को कम करने की शक्ति को ही समाप्त कर दिया गया है।
मोटर यान अधिनियम की धाराओं में सरकार ने किया संशोधन
अब दर्ज कार्रवाई सही पाए जाने पर आरोपित जुर्माने को कोई भी न्यायालय कम नहीं कर सकेगा। अभी तक इस आरोप से आरोपित वाहन स्वामी न्यायालय की शरण लेकर जुर्माना कम करवा लेते थे। अब यह प्रवृत्ति रुकेगी तो वाहन स्वामी प्रावधानों को अनुपान करने के लिए बाध्य होंगे। धारा 200 में इस संशोधन के बाद अब धारा 177ए , धारा 192बी(3) और धारा 201 के अधीन निर्धारित अपराध को अप्रशमनीय से प्रशमनीय बना दिया गया है। परिणाम स्वरूप अब सभी राज्य सरकारों को धारा 200 के अधीन जारी अधिसूचना में संशोधन करना होगा और शामिल करना होगा कि उक्त धाराओं के अधीन अपराध को किन अधिकारियों द्वारा कितने शुल्क के साथ प्रशमित किया जा सकेगा।
चालान होने पर अदालत से जुर्माना कम करा लेते वाहन स्वामी
परिवहन विभाग के प्रवर्तन कार्रवाई के नोडल, यात्री कर अधिकारी रमेश चंद्र प्रजापति ने बताया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहन स्वामियों का विभाग की ओर से चालान तो किया जाता है, लेकिन आरोपित वाहन स्वामी न्यायालय से जुर्माना कम करा लेते हैं। परमिट के बिना या परमिट शर्तों के विरुद्ध संचालन के सापेक्ष वाहन स्वामियों के विरुद्ध दंड कठोर करते हुए न्यायालय द्वारा इस दंड को कम करने की शक्ति को ही समाप्त कर दिया गया है।
अब दर्ज कार्रवाई सही पाए जाने पर आरोपित जुर्माने को कोई भी न्यायालय कम नहीं कर सकेगा। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने सरकार से मांग की है कि न्यायालय में परिवहन विभाग का पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता नियुक्त किए जाएं।
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