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    Kargil Diwas 2021 : जय जवान - जय किसान का नारा जी रहा फौजियों का ये गांव, सीमा और खेतों पर मोर्चा संभाल रहे जवान

    By Ravi MishraEdited By:
    Updated: Mon, 26 Jul 2021 04:40 PM (IST)

    Kargil Diwas 2021 शाहजहांपुर में परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह तथा कारगिल शहीद रमेश सागर समेत अमर शहीद क्रांतिकारियों की शहादत से प्रभावित गांव घनश्यामपुर खिरिया जय जवान- जय किसान नारे को जी रहा है। गांव के 26 लोगों ने सेना में अविस्मरणीय योगदान किया है।

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    Kargil Diwas 2021 : जय जवान - जय किसान का नारा जी रहा फौजियों का ये गांव

    बरेली, जेएनएन। Kargil Diwas 2021 : शाहजहांपुर में परमवीर चक्र विजेता नायक जदुनाथ सिंह तथा कारगिल शहीद रमेश सागर समेत अमर शहीद क्रांतिकारियों की शहादत से प्रभावित गांव घनश्यामपुर खिरिया जय जवान- जय किसान नारे को जी रहा है। गांव के 26 लोगों ने सेना में अविस्मरणीय योगदान किया है। इनमें पूर्व प्रधान स्व. मुरारी सिंह तथा नरेशपाल सिंह की तीसरी पीढ़ी देश की सीमाओं की रक्षा को समर्पित है। सड़क, पानी, स्कूल, अस्पताल सरीखी सुविधाओं से वंचित इस गांव में सेना के अलावा पुलिस, हाेमगार्ड, शिक्षा विभाग में भी दस लोगा का योगदान बना हुआ है।

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    निगोही विकास खंड के कैमुआ नाला किनारे बसा खिरिया गांव सैनिकों का मुख्य केंद्र है। गांव के लोगाें ने जन्म से ही दुश्वारियों से जूझना सीखा। आज भी गांव के लिए कोई सड़क नही है। बारिश के दिनों में कैमुआ नाला के उफनाने से गांव का संपर्क टूट जाता है। यही वजह है कि खिरिया के तमाम लोग टापू पर बस गए। जिसे खिरिया पश्चिमी कहा जाने लगा। पूरा गांव खिरिया पूर्वी बन गया। वर्तमान में टापू पर बसे खिरिया पश्चिमी की आबादी करीब 700 व पूर्वी की करीब 200 है। यह दोनों गांव घनश्यामपुर ग्राम पंचायत का हिस्सा है। दोनों खिरिया 16 लोग सेवा में है। धनश्यामपुर के दस लोग भी सैन्य सेवा से जुड़े। वर्तमान में ग्राम पंचायत 16 लोग सेवा निवृत्त होकर खेती संभाल रहे है, जबिक दस जवान देश की सीमाओं की रक्षा में लगे है।

    तीसरी पीढ़ी कर रही सीमाओ की रक्षा, पूर्व सैनिक संभाल रहे खेती

    घनश्यामपुर के पूर्व प्रधान स्व. मुरारी सिंह भी फौज में थे। उनका बेटा रंजीत सिंह, राजवीर सिंह ने सेना में रहे। बेटा प्रमोद और रंजीत का बेटा रवि भी वर्तमान में राष्ट्र रक्षा को समर्पित है। दूसरे बेटे रोबिन की पत्नी पुलिस में है।

    दो बेटे फौज में एक किसान

    खिरिया पश्चिमी गांव के नरेशपाल सिंह फौज में थे। घरेलू समस्याओं की वजह से सात वर्ष सेवा के बाद त्यागपत्र दे दिया। बेटै देवेंद्र, वीरेद्र को सेना में भेजकर राष्ट्ररक्षा का संकल्प पूरा किया। छोटो बेटा रामऔतार गांव में ही खेतीबाड़ी संभाल रहा है।

    पुलिस होमगार्ड व शिक्षा विभाग में भी योगदान

    गांव के सात लोग पुलिस में हैं। इनमें चार रिटायर हो चुके हैं। तीन सेवारत है। 6 लोग शिक्षक है। इनमें तीन सिवा निवृत्त हो चुके हे। दो परिवारों के लोग होमगार्ड में सेवा दे रहे है।

    बारिश के दिनों में टापू बन जाता गांव

    कागजों में खिरिया एक गांव है, हकीककत में यह गांव दो भागों में बंट हुआ है। खिरिया पूर्वी व पश्चिमी नाम के गांव के बीच का फसला डेढ़ किमी का है। बारिश के दिनों में गांव में दल दल हो जाता है।

    कपड़े बदलकर अपने गंतव्य को जाती है महिलाएं

    इस समय कैमुआ नदी में बाढ़ आने से खिरिया गांव का संपर्क निगोही से कट गया है। पुलिया पर कमर से पानी चल रहा है। महिलाओं को पानी में भीगकर गंतव्य को जाना पड़ता है। इसलिए उन्हें बीच रास्ते में कपड़े बदलने को विवश होना पड़ता है।

    विकास में गांव पीछे है। पुलिया ऊंची करने के लिए लोक निर्माण विभाग से बात की जाएगी। दलदल को दूर करने के लिए सड़क बनवाई जाएगी। ग्राम पंचायत के अलावा क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत से गांव के विकास का प्रयास किया जाएगा। कोशिश होगी कि कोई समस्या न रहे। मोनिका राठौर, ग्राम प्रधान