बरेली, जेएनएन। ITI in Puvayan : तहसील क्षेत्र के युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए नगर में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण आइटीआइ संस्थान का निर्माण हुआ। 11 साल से अधिक समय में यह बनकर तो तैयार हो गया, लेकिन संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। बिजली का कनेक्शन न हो पाने के कारण भवन प्रधानाचार्य को हैंडओवर नहीं हो पा रहा है, जिस कारण यहां के लगभग दो सौ छात्र-छात्राएं 40 किमी. दूर रोजा में पढ़ने जा रहे हैं। नगर में सतवां रोड पर लगभग पांच करोड़ की लागत से बने आइटीआइ में 35 कक्ष बनाए गए हैं। ओवरहेड टैंक आदि का निर्माण हुआ है। देखरेख के लिए एक साल से चौकीदार बलवीर की तैनाती है, लेकिन यहां तक जाने के रास्ता भी नहीं बना है। हालांकि विधायक चेतराम का दावा है कि जल्द ही इसका संचालन शुरू करा देंगे।

2019 में दोबारा शुरू हुआ निर्माण

बसपा शासन में वर्ष 2009-10 में इस आइटीआइ का निर्माण शुरू हुआ था। लैकपेड नाम की संस्था को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। सपा शासन में प्रदेश भर में आइटीआइ निर्माण की जांच हुई तो लैकपेड में तमाम गड़बड़ी पकड़ी गईं और निर्माण बंद हो गया। 2019 मेें भाजपा शासन में आवास विकास परिषद को इसका काम पूरा कराने का जिम्मा सौंपा गया, लेकिन अब भी इसे हैंडओवर नहीं किया जा सका

भवन बनकर तैयार हो गया है। कनेक्शन के लिए बिजली विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। जैसे ही कनेक्शन हो जाएगा। इस भवन को आइटीआइ के प्रधानाचार्य को हैंडओवर कर दिया जाएगा। नवीन वर्मा, अधिशासी अभियंता आवास विकास परिषद

काम तो गत वर्ष ही पूरा कर दिया था, लेकिन बिजली का कनेक्शन न होने के कारण प्रधानाचार्य ने अपने हैंडओवर लेने से मना कर दिया। मेरा लगभग 30 लाख रुपये का भुगतान भी रुक गया है। संबंधित जेई व एक्सईएन से भी वार्ता की, पर समाधान न हुआ। राजेश अग्रवाल, ठेकेदार

420 छात्र-छात्राओं की क्षमता वाली पुवायां आइटीआइ में इस वर्ष 125 नए प्रवेश हुए हैं। अन्य कक्षाओं में भी छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इनके लिए दस शिक्षकों का स्टाफ है। फिलहाल सभी छात्र-छात्राएं पुवायां से आते हैं। नागेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य आइटीआइ रोजा व पुवायां

हमारी तहसील में दो आइटीआइ बने हैं, लेकिन पढ़ाई एक में भी नहीं हो रही। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। ताकि इनका लाभ युवाओं को मिल सके। विनय कुमार

आइटीआइ का संचालन शुरू हो जाए तो छात्र-छात्राओं की दिक्कत दूर हो जाएगी। नगर में ही पढ़ाई होने से प्रवेश भी ज्यादा होंगे। जयेंद्र पटेल

आइटीआइ बनने से क्या लाभ जब इसका संचालन ही नहीं हो रहा है। यह युवाओं से जुड़ा मुद्दा है। जनप्रतिनिधियों को इस पर ध्यान देना चाहिए। हिमांशु मिश्र

Edited By: Ravi Mishra