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    हाकी के हीरो सिमरनजीत सिंह ने रुहेलखंड की झोली में डाला पहला अर्जुन अवार्ड, पीलीभीत में जश्न का माहौल

    By Samanvay PandeyEdited By:
    Updated: Sun, 14 Nov 2021 11:34 AM (IST)

    Hockey hero Simranjit Singh तराई के जिला पीलीभीत में शनिवार की शाम को हाकी के हीरो सिमरनजीत सिंह ने खास बना दिया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में अर्जुन पुरस्कार के लिए सिमरनजीत सिंह के नाम की घोषणा होते ही तराई में फिजां में उल्लास भर गया।

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    मझारा गांव से लेकर मझोला कस्बा और शहर के गांधी स्टेडियम तक जश्न का रहा माहौल

    बरेली, (देवेंद्र देवा)। Hockey hero Simranjit Singh : तराई के जिला पीलीभीत में शनिवार की शाम को हाकी के हीरो सिमरनजीत सिंह ने खास बना दिया। शाम करीब सवा पांच बजे दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में अर्जुन पुरस्कार के लिए सिमरनजीत सिंह के नाम की घोषणा होते ही तराई में फिजां में उल्लास भर गया। मझारा गांव से लेकर जिला मुख्यालय स्थित गांधी स्टेडियम तक लोग खुशी में झूम उठे। एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशी का इजहार करने लगे। इस दौरान टेलीविजन स्क्रीन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों अर्जुन पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र से सिमरनजीत सिंह को सम्मानित किए जाने के दृश्य ने रुहेलखंड मंडल में भी इतिहास रच दिया है। दरअसल रुहेलखंड मंडल में सिमरनजीत सिंह ही पहले अर्जुन पुरस्कार विजेता बने हैं। तराई के इस लाल की इस कामयाबी ने हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

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    उत्तराखंड के सीमावर्ती मझोला क्षेत्र में स्थित गांव मझारा फार्म निवासी फार्मर इकबाल सिंह के पुत्र सिमरनजीत सिंह का बचपन गांव में ही गुजरा। जिसके बाद सिमरनजीत सिंह ने मझोला स्थित सेंट पैट्रिक स्कूल तथा एसके पब्लिक स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने पीलीभीत शहर मेें स्थित बेनहर पब्लिक स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही सिमरनजीत सिंह में हाकी खेल के प्रति लगाव पैदा हो गया। अपने इस लगाव को मुकाम हासिल कराने के लिए सिमरनजीत सिंह पंजाब के बटाला में रहने वाले अपने ताऊ रक्षपाल सिंह के पास चले गए। पंजाब में ही सिमरनजीत सिंह ने हाकी खेल की बारीकियों का प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय हाकी टीम में जगह बनाई।

    टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हाकी टीम ने 41 साल बाद कांस्य पदक जीतने का इतिहास रचा। जिसमें सिमरनजीत सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सिमरनजीत के शानदार खेल प्रदर्शन की बदौलत ही उन्हें देश के प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के लिए चुना गया। दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शिरकत करने के लिए सिमरनजीत सिंह शुक्रवार की सुबह अपनी पत्नी डॉ. हरप्रीत कौर के साथ रवाना हुए। शुक्रवार की शाम उन्होंने समारोह के पूर्वाभ्यास में भाग लिया। शनिवार की शाम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तराई के लाल सिमरनजीत सिंह को अर्जुन पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान सिमरनजीत के गांव मझारा तथा मझोला कस्बे में जश्न का माहौल हो गया। वहीं शहर में स्थित गांधी स्टेडियम में जुटे खिलाड़ियों ने भी एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।

    सिमरनजीत ने बेशकीमती तोहफा दिया : शनिवार की शाम राष्ट्रपति भवन में शिरकत करने से पहले सिमरनजीत सिंह ने पत्नी के साथ फोटो खिंचवाई। इस फोटो को उन्होंने जागरण से शेयर किया है। सिमरनजीत सिंह का विगत छह नवंबर को पंजाब के अमृतसर शहर में डॉ. हरप्रीत कौर से विवाह हुआ है। अपने पति की इस उपलब्धि से डॉ. हरप्रीत कौर बेहद खुश दिखाई दी। उनका कहना है कि विवाह के बाद सिमरनजीत ने अर्जुन पुरस्कार के रूप में बेशकीमती तोहफा दिया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में शिरकत करना भी उनके लिए जीवन का यादगार लम्हा है।