पूर्व राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा का निधन, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री रहे सपा के संस्थापक सदस्य पूर्व सांसद राममूर्ति सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हाे गया। वह लगभग 71 के थे। शुक्रवार को पैतृक गांव शाहजहांपुर के हार गुरैया में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

बरेली, जेएनएन।प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री रहे सपा के संस्थापक सदस्य पूर्व सांसद राममूर्ति सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हाे गया। वह लगभग 71 के थे। शुक्रवार को पैतृक गांव शाहजहांपुर के हार गुरैया में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। किडनी की समस्या से पीड़ित राममूर्ति वर्मा का दिल्ली से इलाज चल रहा था।
21 अप्रैल को उन्हें अचानक तबीयत बिगड़ने पर बरेली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां गुरुवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए शहर के इंदिरानगर कालोनी स्थित आवास पर रखा गया। इसके बाद पार्थिव शरीर को पैतृक गांव जलालाबाद के हारगुरैया गांव ले जाया गया।
जहां एसडीएम सौरभ भट्ट की उपस्थिति में राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई। इस अवसर पर सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां, महासचिव रणंजय सिंह, भाजपा विधयक रोशनलाल वर्मा, वीर विक्रम सिंह, एमएलसी अमित यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिप्रकाश वर्मा समेत बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
राजनीतक सफर
तीन बार जलालबाद व एक बार ददरौल विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे रामामूर्ति सिंह वर्मा ने दो बार लोकसभा में भी जिले का प्रतिनिधित्व किया। 1980 में वह ब्लाक प्रमुख बने। 1989 में जनता दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। जनता दल विभाजन पर उन्होंने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का साथ दिया। 1991 में मुलायम सिंह यादव ने उन्हें समाज कल्याण उपमंत्री बनाया।
1993 का भी चुनाव राममूर्ति सिंह वर्मा ने जलालाबाद से जीता। 1996 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता। 2001 में जितेंद्र प्रसाद बाबा साहब के निधन के बाद उपचुनाव में दोबारा संसद में प्रतिनिधित्व किया। 2012 में राममूर्ति वर्मा ददरौल विधानसभा से जीते तो अखिलेश यादव ने उन्हें राज्यमंत्री बनाया। 2017 से वह अस्वस्थ थे। 2005 में उनकी बहू अर्चना वर्मा को जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थी।
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