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    Bacterial Leaf Blight: धान की इस खतरनाक बीमारी से परेशान न हो किसान, समझे रोग, पहचाने लक्षण, जाने बचाव

    By Ravi MishraEdited By:
    Updated: Tue, 30 Aug 2022 04:20 PM (IST)

    Bacterial Leaf Blight News किसान धान में लगने वाले खतरनाक रोग से परेशान ना हो।यह रोग कम वर्षा होने की वजह से फसलों में लगता हैं। जो धान की फसल में बैक्टीरिया जैन्थोमोनास औराइजी से फैलता है

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    Bacterial Leaf Blight: धान की इस खतरनाक बीमारी से परेशान न हो किसान, समझे रोग, पहचाने लक्षण, जाने बचाव

    बरेली, जागरण संवाददाता। : मानसूनी वर्षा कम होने के अब कीटों फसलों को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। कम वर्षा होने से धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ खेत में कई तरह के रोग एवं कीट देखने को मिल रहे हैं। इस समय सबसे ज्यादा प्रकोप धान में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट का देखा जा रहा है।

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    इससे किसान पर दोहरी मार पड़ रही है। बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट धान का बहुत खतरनाक रोग है। यह रोग बैक्टीरिया जैन्थोमोनास औराइजी से फैलता है। यह जानकारी देने का साथ ही कृषि वैज्ञानिक डा. रंजीत सिंह का कहना है कि इस रोग की समय रहते पहचान करके बचाव करना जरूरी है। अन्यथा धान की फसल बर्बाद हो सकती है।

    जाने इस रोग के फैलने की वजह

    1. यदि हवा में नमी कम हो और तापमान 25 से 30 डिग्री हो जाए।

    2.बहुत अधिक वर्षा होने से खेत में पानी भर जाता है या वर्षा बहुत कम होने से खेत में खुश्की हो।

    3.धान की रोपाई बहुत नजदीक की गई हो, जिससे पौधों की बढ़वार अधिक हो जाती है।

    4. नाइट्रोजन एवं अन्य उर्वरको की मात्रा अधिक प्रयोग करने से बढ़वार हो गई हो।

    5.असंतुलित उर्वरको के प्रयोग से भी हो जाता है।

    6- इस बीमारी का फैलाव पशुओं या मनुष्यो के प्रकोपित खेत से सही खेत में जाने से या सिंचाई का पानी प्रकोपित खेत से स्वस्थ खेत में जाने से भी होता है।

    ऐसे समझें बीमारी के लक्षण

    रोगजनक बैक्टीरिया पत्तियों की सतह पर बने स्टोमेटा के माध्यम से अंदर प्रवेश करता है। सबसे पहले पत्ति का अगला शिरा पीला भूरा रंग का होता है। बाद में पूरी पत्ती पर यह रोग फैल जाता है और पत्ती राख के रंग की होकर सिकुड़ने लगती है।

    कभी-कभी शाम के समय पत्तियों के ऊपर ओस जैसे पानी के बिंदु भी दिखाई देते हैं। यह रोग अनुकूल परिस्थितियों में बहुत व्यापक रूप धारण कर लेता है।

    इस रोग के प्रकोप से फसल के दाने भी प्रभावित होते हैं, जिससे अगले मौसम के लिए बीज नहीं बन पाता है।

    लक्षण नजर आने पर ऐसे करें बचाव

    रोग प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि बीज शोधन करने के उपरांत ही पौध तैयार की जाए।

    खेत में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग किया जाए।

    एक प्रकोपित खेत का पानी दूसरे खेत में न जाने दे।

    मजदूरों को स्प्रे करने से पूर्व कपड़े बदल कर और सभी स्प्रे पंप उपकरण आदि को साफ करके प्रयोग करें।

    खेत में जंगली पशुओं, कुत्ते गिलहरी, चूहे आदि को जाने से रोके।

    रासायनिक दवा के उपचार में कापर आक्सिक्लोराइड 500 ग्राम और 30 ग्राम स्ट्रेप्टो साईक्लीन के घोल का छिड़काव करें।अधिक गर्म मौसम होने पर कॉपर हाइड्रोक्साइड 250 ग्राम व 30 ग्राम स्ट्रैप्टोसाइक्लीन का घोल बनाकर छिड़काव करें।नियमित रूप से वैज्ञानिकों के संपर्क में रहें।

    धान के खेत को सूखा ना रखें हल्का पानी लगा कर, नमी बनाए रखें।