तर्क संगत और वैज्ञानिक सोच से खड़ी करें बुलंदी की मीनार
बरेली: आपका नजरिया ही आपकी तरक्की का मार्ग प्रशस्त करता है। नजरिया संकीर्ण नहीं व्यापक होना चाहिए। ज
बरेली: आपका नजरिया ही आपकी तरक्की का मार्ग प्रशस्त करता है। नजरिया संकीर्ण नहीं व्यापक होना चाहिए। जितनी बड़ी सोच रहेगी उतनी बड़ी उपलब्धि हासिल होगी। तर्क संगत और वैज्ञानिक सोच से हम न केवल प्रगतिवान बनते हैं बल्कि हमारी सोच दूसरों को प्रभावित करने लायक होती है। हर शख्स को तर्क संगत सोच का होना चाहिए।
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जितनी तर्कसंगत बात उतनी ही व्यावहारिक
बातें हवा-हवाईं नहीं होनी चाहिए। ख्याली पुलाव पकाने से कुछ हासिल नहीं होने वाला। हमें हमेशा अपनी बात मजबूत तर्को के साथ रखनी चाहिए। तभी वह दूसरों के दिमाग में प्रभाव छोड़ने में सफल रहेगी।
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तकनीक और अनुभव से मिलती है सफलता
किसी भी कार्य को करने के लिए तकनीक और अनुभव की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इन दो चीजों के दम पर हमारा लक्ष्य आसान हो जाता है। तकनीक के दम पर मंजिल आसान हो जाती है तो अनुभव के दम पर हमसे किसी भी प्रकार की चूक या गलतियों के होने की गुंजाइश नहीं रहती।
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तभी बन पाएंगे यथार्थवादी
जो सच के करीब होता है लोग उसी पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। हमें काल्पनिक नहीं बल्कि यथार्थवादी होना चाहिए। तभी हमारे विचार धरातल पर उतर सकेंगे। बगैर तर्क संगत और वैज्ञानिक सोच के हम वास्तविक या यथार्थवादी नहीं हो सकते।
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तर्को की कसौटी पर हर चीज को परखें
कोई कुछ कहे तो उसपर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। हर बात को हमेशा तर्को की कसौटी पर परखना चाहिए। ताकि पता चल सके कि बात सही है या गलत।
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करते रहें वैज्ञानिक चिंतन
वैज्ञानिक चिंतन प्रगति के द्वार खोलती है। जो जितना अधिक वैज्ञानिक सोच का है वह उतना ही अधिक सफलता के रास्ते पर अग्रसर होता है। वैज्ञानिक चिंतन से हम सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास आदि से दूर रह सकते हैं। वैज्ञानिक चिंतन से हमारी मानसिक क्षमता स्वस्थ होने के साथ और बेहतर होती है।
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घर में हमेशा तार्किक बात करें
घर में बच्चों के सामने हमेशा हमें तार्किक बातें करनी चाहिए। अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली या फिर निराधार बातें कभी नहीं करनी चाहिए। ताकि बच्चे भी हमेशा तर्क संगत सोच अख्तियार करें। उन्हें हमेशा वैज्ञानिक चिंतन के लिए प्रेरित करें। इसके लिए वैज्ञानिक प्रोत्साहन वाली साहित्य भी बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
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स्कूल करें क्षमता का विकास
स्कूल में बच्चे एक अनुशासित माहौल में समय गुजारते हैं। इस नाते यहां पर बेहतर तरीके से उनके सोचने और समझने की क्षमता का विकास हो सकता है। इस नाते स्कूलों को चाहिए कि वे बच्चों में तर्क संगत और वैज्ञानिक सोच का विकास करें। उन्हें हमेशा वही मानने को कहें जिसमें जरा भी तर्क हो या फिर वैज्ञानिक आधार हो।
रीना भटनागर, कोआर्डिनेटर, बीएल इंटरनेशनल
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अभिभावक की बात
हर अभिभावक को चाहिए कि वह बच्चों को तर्क संगत सोच के लिए तैयार करे। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें मानसिक रूप से परिपक्व बनाया जाए। ताकि वह वैज्ञानिक चिंतन करने में सक्षम हो सकें। इसके लिए बच्चों को किसी भी सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे पर स्वस्थ वाद विवाद करने के लिए प्रेरित करें।
माला, अभिभावक
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