Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    एक बस्ती ऐसी जहां नहीं पहुंचा विकास का उजियारा

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 18 Nov 2020 12:08 AM (IST)

    एक ओर जहां स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है। वहीं रामनगर तहसील क्षेत्र की ग्राम प्यारेपुर मजरे गगियापुर की अनुसूचित जाति बस्ती में लोगों के घरों के सामने खुदे गड्ढों से गंदा पानी उन्हें खुद ही उलीचना पड़ता है।

    एक बस्ती ऐसी जहां नहीं पहुंचा विकास का उजियारा

    प्रेम अवस्थी, बाराबंकी

    एक ओर जहां स्वच्छ भारत मिशन चल रहा है। वहीं, रामनगर तहसील क्षेत्र की ग्राम प्यारेपुर मजरे गगियापुर की अनुसूचित जाति बस्ती में लोगों के घरों के सामने खुदे गड्ढों से गंदा पानी उन्हें खुद ही उलीचना पड़ता है।

    घर में नहाने-धोने सहित अन्य कार्यों के उपयोग से बेकार पानी इन गड्ढों में एकत्र होता है। परिवार के लोग उसे बाल्टी या डिब्बों में हाथों से भरकर बाहर उलीचते हैं। लोग जिस तरह से गद्दे पानी को उलिच कर स्वच्छता बनाए हुए हैं। वह वाकई में काबिले तारीफ है, लेकिन 'सबका साथ-सबका विकास' के दावे पर इस बस्ती का यह हाल कई सवाल खड़े करता है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    कस्बा तिलोकपुर से सिहाली मार्ग पर प्यारेपुर गांव स्थित है। मुख्य सड़क से सीमेंटेड रोड गांव के अंदर गई है। अनूसूचित जाति की बस्ती में नाली न बने होने से लोगों को दिक्कत है, जबकि गांव की तरफ से दलित बस्ती की सरहद तक नाली बनी? इस नाली से गांव का पानी अनुसूचित जाति बस्ती में भी खासकर बारिश के समय आ जाता है तब दोहरी परेशानी होती है। अपने घर के सामने बने गड्ढे के पानी को डिब्बे में भरकर उलीचते दिखे सर्वेश कुमार ने बताया कि नाली न होने के कारण यह कार्य हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। सर्वेश के घर के सामने ही खड़ंजा के दूसरी तरफ सरकारी हैंडपंप लगा है, लेकिन वह भी इसलिए बंद है क्योंकि नाली नहीं है। सर्वेश कुमार के घर के बाहर निजी हैंडपंप की चौकी स्थल से प्लास्टिक का पाइप गड्ढे तक लगा है। हैंडपंप की चौकी से जो पानी बहकर आता है वह गड्ढे में भरता है। दुर्गेश के घर के सामने भी हैंडपंप के पास गड्ढा बना है। गर्भवती महिला कृष्णावती ने बताया कि उसे भी गड्ढे का पानी उलीचना पड़ता है।

    इनसेट- प्यारेपुर की अनुसूचित जाति बस्ती में नाली सीसी सड़क के किनारे क्यों नहीं बनी? इसकी जांच कर समस्या का समाधान कराया जाएगा।''

    रणविजय सिंह, डीपीआरओ, बाराबंकी