Railway Updates: झांसी-मानिकपुर 290 किमी ट्रैक पर 104.6 करोड़ से लगेगा कवच, ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
झांसी से मानिकपुर तक 290 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर 104.6 करोड़ रुपये की लागत से 'कवच' प्रणाली स्थापित की जाएगी। ...और पढ़ें

मानिकपुर स्टेशन।
HighLights
झांसी-मानिकपुर 290 किमी रेलमार्ग पर लगेगा कवच प्रणाली।
104.6 करोड़ रुपये की परियोजना, मार्च 2028 तक लक्ष्य।
ट्रेन सुरक्षा मजबूत होगी, मानवीय चूक से बचाव संभव।
प्रवीण कुमार, बांदा। झांसी से मानिकपुर तक 290 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर अब ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को नई तकनीक से मजबूत किया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने पूरे रेलखंड पर कवच लगाने के लिए 104.6 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। अगस्त 2025 में स्वीकृत इस परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल टेंडर प्रक्रिया अंतिम दौर में है और अगले साल की शुरुआत तक इसके पूरा होने की उम्मीद है।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही कवच लगाने का काम शुरू किया जाएगा। पूरी परियोजना में झांसी से मानिकपुर तक के रेलखंड को शामिल किया गया है, जिससे इस मार्ग पर चलने वाली ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और मजबूत किया जा सकेगा।
झांसी से मानिकपुर के बीच वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, ओरछा, बरुआसागर, निवाड़ी, मऊरानीपुर, हरपालपुर, घुटई, बेलाताल, कुलपहाड़, चरखारी रोड, महोबा, बरीपुरा, कबरई, मटौंध, खैरार जंक्शन, बांदा, डिंगवही, खुरहंड, अतर्रा, बदौसा, भरतकूप, शिवरामपुर, चित्रकूटधाम कर्वी, खोह, बहिलपुरवा और मानिकपुर स्टेशन पड़ते हैं। परियोजना के दायरे में इन स्टेशनों के बीच का पूरा 290 किलोमीटर रेलखंड शामिल है।
कवच लगाने के लिए पहले ट्रैक और स्टेशनों पर जरूरी उपकरण लगाए जाएंगे। इसके साथ ट्रेनों के इंजन में भी संबंधित उपकरण लगाए जाएंगे। ट्रैक और सिग्नल से मिलने वाली जानकारी को इन उपकरणों के माध्यम से इंजन तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
अलग-अलग हिस्सों में उपकरण लगने के बाद उनकी कनेक्टिविटी और काम करने की स्थिति की जांच होगी। इसके बाद ट्रेन चलाकर व्यवस्था का परीक्षण किया जाएगा। जांच और परीक्षण में सब कुछ सही मिलने के बाद ही संबंधित हिस्से में कवच को संचालन के लिए तैयार किया जाएगा।
पूरे काम के दौरान रेलवे अधिकारी उपकरणों की गुणवत्ता और काम की प्रगति की निगरानी भी करेंगे।अगले साल की शुरुआत में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना जमीन पर दिखाई देने लगेगी। 290 किलोमीटर लंबे रेलखंड के अलग-अलग हिस्सों में काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
क्या होता है कवच
कवच ट्रेन को सुरक्षित चलाने में मदद करने वाली स्वचालित सुरक्षा व्यवस्था है। इसमें इंजन के साथ ट्रैक और सिग्नल से जुड़ी व्यवस्था भी शामिल होती है। ट्रेन कहां है, कितनी गति से चल रही है और आगे सिग्नल की क्या स्थिति है, इसकी जानकारी इस व्यवस्था को मिलती रहती है। अगर ट्रेन तय सीमा से ज्यादा तेज चलने लगे या चालक लाल सिग्नल के बाद समय पर ब्रेक न लगाए तो कवच चालक को चेतावनी देता है। जरूरत पड़ने पर यह ट्रेन में अपने आप ब्रेक लगाने में भी मदद कर सकता है। यानी चालक की किसी चूक की स्थिति में कवच सुरक्षा की अतिरिक्त ढाल की तरह काम करता है।
यात्रियों को ये फायदा मिलेगा
यात्रियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना है। ट्रेन चलाते समय चालक से किसी कारणवश गलती हो जाए, गति ज्यादा हो जाए या सामने खतरे की स्थिति हो और समय पर कार्रवाई न हो पाए तो कवच चेतावनी देने में मदद करेगा। इससे ऐसी स्थिति में समय रहते ट्रेन की गति नियंत्रित करने का मौका मिलेगा। कोहरे के दौरान जब सिग्नल और आगे का रास्ता साफ दिखाई देना मुश्किल होता है, तब भी कवच से चालक को जरूरी जानकारी मिलने में सहायता होगी। इससे यात्रियों को ट्रेन में सुरक्षा की एक अतिरिक्त तकनीकी व्यवस्था मिलेगी।
ट्रेन संचालन पर ये असर पड़ेगा
कवच लगने के बाद ट्रेन चलाने के दौरान चालक को केवल सामने दिखाई देने वाली स्थिति पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। ट्रेन की गति, सिग्नल और आगे की स्थिति से जुड़ी जानकारी व्यवस्था के माध्यम से मिलती रहेगी। इससे ट्रेन को सुरक्षित गति में चलाने और जरूरत के अनुसार समय पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। आगे कोई ट्रेन होने की स्थिति में सुरक्षित दूरी बनाए रखने में भी यह व्यवस्था सहायक होगी। खासकर कोहरे और कम दृश्यता के समय ट्रेन संचालन में अतिरिक्त मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य ट्रेन की गति बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से नियंत्रित रखने में सहायता करना है।
इस रूट पर होगा फायदा
झांसी से मानिकपुर तक करीब 290 किलोमीटर लंबा रेलखंड है। इस पूरे मार्ग पर कवच लगने के बाद झांसी से मानिकपुर के बीच चलने वाली ट्रेनों को एक ही तरह की अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था मिलेगी। रास्ते में आने वाले स्टेशनों, सिग्नलों और ट्रैक के अलग-अलग हिस्सों के बीच ट्रेन की स्थिति पर तकनीकी निगरानी रखने में मदद होगी। इससे लंबे रेलमार्ग पर कहीं चालक से चूक होने या ट्रेन की गति जरूरत से ज्यादा बढ़ने जैसी स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय होने में सहायता मिलेगी। झांसी, बांदा, चित्रकूट और मानिकपुर के बीच चलने वाली ट्रेनों के लिए यह पूरे मार्ग में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत तैयार करेगा।
इनकी जिम्मेदारी में होगा काम
झांसी मंडल स्तर पर कवच परियोजना का काम डिप्टी सीएसटीई प्रोजेक्ट राज कुमार और एसएसइ प्रहलाद चिचोड़िया की जिम्मेदारी में कराया जाएगा। दोनों अधिकारी काम की प्रगति और गुणवत्ता की निगरानी करेंगे। रेलवे ने पूरी परियोजना मार्च 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
कवच परियोजना की टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को काम सौंपा जाएगा। इसके बाद रेलखंड के अलग-अलग हिस्सों में उपकरण लगाने का काम शुरू होगा। काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए जांच और परीक्षण भी कराया जाएगा।
-मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, झांसी मंडल
उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मुख्यालय स्तर से भी परियोजना की प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जा रही है। पीसीएसटीई दीपक कुमार सिन्हा की निगरानी में परियोजना इकाई टेंडर से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ा रही है। टेंडर पूरा होने के बाद कार्य की प्रगति के अनुसार विभिन्न हिस्सों में कवच की स्थापना का काम कराया जाएगा।
-डा. शिवम शर्मा, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज
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