बांदा में कोडीन युक्त कफ के मास्टरमाइंड का बहनोई गिरफ्तार, 24 ठिकानों पर दबिश देने के बाद चढ़ा हत्थे
नौ करोड़ रुपये के कोडीनयुक्त कफ सीरप प्रकरण में मुख्य आरोपित प्रियांशु गुप्ता के बहनोई रवींद्र गुप्ता को बांदा में ...और पढ़ें

यह प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
नौ करोड़ के कोडीनयुक्त कफ सीरप मामले में गिरफ्तारी।
मुख्य आरोपित प्रियांशु गुप्ता के बहनोई रवींद्र गुप्ता गिरफ्तार।
रवींद्र से कफ सीरप नेटवर्क की खरीद-बिक्री पर पूछताछ होगी।
जागरण संवाददाता, बांदा। नौ करोड़ रुपये के कोडीनयुक्त कफ सीरप प्रकरण में मुख्य आरोपित प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन के बहनोई हमीरपुर के भरुआ सुमेरपुर थाना क्षेत्र के बरुआ गांव निवासी रवींद्र गुप्ता, जो टेढ़ा मोड़ स्थित ओम मेडिकल एजेंसी का संचालक है, को पुलिस ने शुक्रवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया।
तीन सितंबर से फरार चल रहे रवींद्र को 22 दिन बाद बदौसा थाना क्षेत्र में बांदा-चित्रकूट रोड स्थित बदौसा रेलवे स्टेशन तिराहे के पास पकड़ा गया। विवेचक गौरव मिश्रा व सिपाही जितेंद्र कुमार ने घेराबंदी कर उसे दबोचा। विवेचक के अनुसार रवींद्र मध्य प्रदेश के मझगवां में रिश्तेदारी में गया था और शुक्रवार को बदौसा पहुंचा था। पुलिस के मुताबिक इन 22 दिनों में वह कानपुर, फतेहपुर समेत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में लगातार ठिकाने बदलता रहा।
तीन करोड़ की 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप पकड़ा था
तीन सितंबर को एसटीएफ और बिसंडा पुलिस ने पुनाहुर के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर डीसीएम से करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की 250 पेटी में 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप बरामद किया था। मौके से बिसंडा थाना क्षेत्र के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र, अतर्रा थाना क्षेत्र के लखन कालोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता, रामलीला मैदान निवासी रोहित पांडेय और हापुड़ के बहादुरगढ़ क्षेत्र के भैना गांव निवासी शेखर को गिरफ्तार किया गया था।
इन जिलों में हुई और भी बिक्री
सात सितंबर को आगरा से अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन की गिरफ्तारी के बाद आरोपितों की संख्या पांच हो गई। जांच में करीब तीन-तीन करोड़ रुपये की दो खेप पहले खपाए जाने की जानकारी सामने आई। इनकी बिक्री बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और मध्य प्रदेश के सतना समेत अन्य क्षेत्रों में किए जाने की बात भी सामने आई थी। इस तरह करीब नौ करोड़ रुपये के सीरप कारोबार की कड़ियां जांच में मिली हैं। तीन सितंबर को पकड़ी गई खेप के बिल सीधे हमीरपुर के टेढ़ा मोड़ स्थित ओम मेडिकल एजेंसी के नाम मिले थे।
रवींद्र गुप्ता की थी एजेंसी
एजेंसी रवींद्र गुप्ता की है और वह प्रियांशु का बहनोई है। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में महोबा, हमीरपुर, कानपुर, फतेहपुर और आगरा समेत करीब 25 ठिकानों पर दबिश देती रही। नौ सितंबर को उसकी आखिरी लोकेशन हमीरपुर में मिली थी, जिसके बाद मोबाइल बंद हो गया। उसके संपर्क में रहने वाले एक दर्जन से अधिक नंबर सर्विलांस पर लगाए गए थे।
कल कोर्ट में पेश किय जाएगा रवींद्र
रवींद्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ओम मेडिकल एजेंसी के नाम से हुई खरीद, भुगतान, बिल और सीरप की सप्लाई के साथ पहले खपाई गई दोनों खेपों की कड़ियां जोड़ेगी। ओम मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस 22 सितंबर को औषधि विभाग निरस्त भी कर चुका है। रवींद्र को शनिवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पूछताछ में रवींद्र गुप्ता ने बताया है कि उसके बिल-बाउचर का इस्तेमाल उसका साला प्रियांशु गुप्ता करता रहा है। उसने सीरप की खरीद-बिक्री की जानकारी होने से इन्कार किया है। उसके बयान का सत्यापन विवेचना में बिल, भुगतान और अन्य अभिलेखों से किया जाएगा। शनिवार को उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा।
- पलाश बंसल, एसपी बांदा
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