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Kanpur Businessman Murder Case: पिता की हत्या के मास्टरमाइंड बेटे सुब्रत का कबूलनामा... शालू को कोई जानकारी नहीं थी

Published: Fri, 25 Sep 2026 05:31 PM (IST)

कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बेटे सुब्रत ने अपने पिता की हत्या का गुनाह कबूल कर लिया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बेटे सुब्रत ने पिता विनीत मिनोचा की हत्या कबूली।

  2. बहू शालू को फंसाने की साजिश भी सुब्रत ने रची थी।

  3. सुब्रत ने कर्ज और संपत्ति विवाद को बताया कारण।

जागरण संवाददाता, कानपुर। Kanpur Businessman Murder Case: कानपुर दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के बाद कस्टडी रिमांड पर बहू शालू का पहली बार पति सुब्रत से सामना कराया गया। पति को सामने देख वह खुद को संभाल नहीं सकी। शालू फफक कर रो पड़ी। उसकी नजरें सुब्रत पर टिकी थीं। पुलिस से कहा, मेरे बच्चे के लिए इन्हें जानें दीजिए मैं जेल जा रही हूं। बस यहीं सुब्रत टूट गया।

इस बातचीत ने सुब्रत के मन को ऐसा बदला कि उसने रात में अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। इस हत्याकांड में शालू बेगुनाह निकली है। इसके बाद सुब्रत ने पुलिस को सब कुछ बता दिया। उसने हत्या की साजिश से लेकर शालू को फंसाने के बारे में विस्तार से बताया।

ये है पूरा कबूलनामा

तकिये से दबाकर मारना था

मैने विशाल और उसके साथी राजकिशोर से कहा था कि जब हम निकल जाएंगे तो फ्लैट के अंदर चले जाना। उसे चाबी दे दी थी। उससे कहा था कि जब आना तो अंदर मेरे कमरे में छिपे रहना। जब पिता आएं और और सो जाएं तो एक लोग पैर पकड़ना और दूसरा मुंह पर तकिया रखकर दबाकर हत्या कर देना।

पिता के कई महिलाओं से थे अवैध संबंध

पिता का चरित्र खराब था। उनके कई महिलाओं के साथ अवैध संबंध थे। शक था कि कभी कहीं किसी को वह शादी करके न ले आएं या कोई और न आ जाए कि वह गर्भवती है। डर था कि कहीं उसकी संपत्ति न चली जाए। मेरे ऊपर लगभग 40 लाख का कर्ज है। महीने की लगभग 55-56 हजार की किस्त जाती है।

लोन चुकाने थे

पिता महीने में 40 हजार रुपये देते थे। इससे लोन चुकाने के लिए लोन लेने लगा। क्रेडिट कार्ड से रुपये निकाले। दुकान से विशाल के जरिए माल चोरी करवाते थे। पहली बार हत्या की योजना तीन-चार माह पहले बनाई। विशाल से कहा था कि जितना कर्जा है वह चुका देगा। डेढ़ लाख उसका कर्जा है।

किटी पार्टी की दी थी विशाल को जानकारी

विशाल को बताया कि किटी पार्टी में हम लोग जाएंगे। कैमरा बंद कर दिया है। पिता की हत्या कर ठीक से देख लेना और फिर निकल जाना। हम लोग सुबह आएंगे। अगर रात में भी आएंगे तो उस समय देखेंगे नहीं। अगले दिन देखेंगे और रिश्तेदारों को फोन करेंगे पिता की मृत्यु हो गई। अगर कोई पूछता तो बताते स्वाभाविक मौत या हार्ट अटैक हुई।

शालू का नाम ले लेना

घर की चाबी गाड़ी में लगी रहती थी। उसी से निकालकर डुप्लीकेट बनवाकर दी। डुप्लीकेट उसने हमे दे दी और असली खुद रख ली। राजकिशोर को कभी नहीं देखा। शालू को कुछ भी जानकारी नहीं थी। विशाल से मैने ही कहा था कि भइया फंसो तो मेरा नहीं शालू का नाम ले लेना।


पुलिस से निष्पक्ष विवेचना की उम्मीद थी। निष्पक्ष विवेचना की गई। अब पुलिस कोर्ट में जल्द अपनी रिपोर्ट दाखिल करे तो शालू जेल से बाहर आ जाए।
-शिवाकांत दीक्षित, अधिवक्ता

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