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कानपुर दवा कारोबारी हत्याकांड में बहू को क्लीन चिट, तो क्या पहले पुलिस ने साक्ष्य झूठे दिखाए? जानें क्यों उठ रहे सवाल

Published: Fri, 25 Sep 2026 03:26 PM (IST)

कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में नया मोड़ आया है, जहां बेटे सुब्रत ने पिता की हत्या की ...और पढ़ें

दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड के मास्टरमाइंड सुब्रत के अपराध बारे में जानकारी देते पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल व पीछे खड़ा आरोपित सुब्रत। जागरण

दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड के मास्टरमाइंड सुब्रत के अपराध बारे में जानकारी देते पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल व पीछे खड़ा आरोपित सुब्रत। जागरण

HighLights

  1. बेटा सुब्रत निकला दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड का मास्टरमाइंड

  2. पहले आरोपी बनाई गई बहू शालू को पुलिस ने निर्दोष घोषित किया

  3. बोला, पिता के कई महिलाओं से थे अवैध संबंध, डर था किसी से शादी न कर लें

जागरण संवाददाता, कानपुर। कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। नौकर के बयान के बाद बेटे सुब्रत को साजिशकर्ता मानते हुए गिरफ्तार किया गया। लेकिन पूरी जांच के बाद अब सवाल पुलिस पर ही उठने लगे हैं। आखिर उसी नौकर के किस बयान और कौन से साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने बहू शालू को गुनाहगार मान लिया था।


दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की मास्टरमाइंड बहू शालू नहीं, बेटा सुब्रत था। जिस पुराने नौकर पर हत्या का आरोप है, वह बुधवार को अपने पुराने बयान से पलट गया और शालू की जगह सुब्रत का नाम लिया। बाद में आरोपितों से आमना-सामना कराए जाने के बाद सुब्रत ने भी यह बात कबूल कर ली।

उसने बताया कि पिता का चरित्र ठीक नहीं था। कई महिलाओं से उनके अवैध संबंध थे और उसे डर था कि कहीं संपत्ति का बंटवारा न हो जाए। इसी वजह से उसने हत्या कराई थी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि सुब्रत को जेल भेज दिया गया है। शालू निर्दोष है। पुलिस बीएनएस की धारा 190 के तहत अदालत से उसकी रिहाई का अनुरोध करेगी।


पूछताछ में सुब्रत ने पुलिस को बताया कि उस पर करीब 40 लाख रुपये कर्ज था। किस्त भरने को उसे हर माह 55 हजार रुपये की जरूरत होती थी, पर पिता केवल 40 हजार रुपये देते थे। उसे डर था कि पिता कहीं किसी महिला से शादी न कर लें या कोई ऐसी महिला सामने न आ जाए जो दावा कर दे कि वह उनके बच्चे की मां बनने वाली है। ऐसे में संपत्ति का बंटवारा हो जाएगा और वह कर्ज नहीं उतार पाएगा।

इंदिरा नगर स्थित रतन आर्बिट अपार्टमेंट में रहने वाले दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की पांच सितंबर की रात उनके फ्लैट में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने कैमरों की मदद से उनके पुराने नौकर विशाल गौतम व साथी राजकिशोर को पकड़ा।

पूछताछ में तब विशाल ने बताया था कि बहू शालू ने छह लाख रुपये सुपारी देकर विनीत मिनोचा की हत्या कराई थी। पुलिस ने शालू को भी गिरफ्तार कर तीनों को जेल भेज दिया था। तीनों आरोपितों को बुधवार दोपहर रिमांड पर पुलिस जेल से लाई।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि चार दौर में आरोपितों और सुब्रत से पूछताछ की गई। सुब्रत अपनी पत्नी पर दोष मढ़ता रहा, लेकिन देर रात कबूल किया कि उसीने साजिश रची थी। विशाल को समझाया था कि पकड़ा जाए तो शालू का नाम ले। सुब्रत ने ही विशाल से फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बनवाई थी, जिससे वह पहले से अंदर जा सके। सुब्रत ने ही घर के कैमरों की रिकार्डिंग बंद कर दी थी।

कुछ सवाल अभी बाकी

  • पहले पुलिस ने जो राजफाश किया उसमें शालू को आरोपित बनाने के लिए तमाम साक्ष्य दिए, लेकिन अब सवाल है कि क्या वे गलत थे।
  • पहले नौकर की बात मानकर पुलिस ने शालू को जेल भेज दिया, अब फिर उसी की बात मानकर उसके पति सुब्रत को गिरफ्तार कर लिया।
  • सुब्रत ने हत्या कराई तो पत्नी को फंसाना क्यों चाहता था और शालू ने इसका विरोध क्यों नहीं किया। कहीं आपसी संबंधों में कुछ खटास तो नहीं थी।
  • घटना वाली रात पति-पत्नी जहां थे, वहां के कैमरों में दिखा है कि शालू के पास काल आती है, फिर वह सुब्रत से जाकर बात करती है, वह काल किसकी थी।

 

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