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    International Day For Biological Diversity: जैव विविधता का खजाना 'सोहेलवा', दुर्लभ पशु-पक्षियों की प्रजातियां देख हैरान रह जाएंगे

    Updated: Wed, 21 May 2025 07:44 PM (IST)

    सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग 452 वर्ग किमी में फैला जैव विविधता का खजाना है। यहां दुर्लभ पशु-पक्षी और जड़ी-बूटियां पायी जाती हैं। जंगल के नाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां पक्षियों की 400 प्रजातियां हैं और तीन बाघों की मौजूदगी से वन विभाग उत्साहित है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने और जंगल सफारी विकसित करने की योजना है। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यटकों को सुविधाएं मिलेंगी।

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    सोहेलवा की गोद में छिपा जैव विविधता का खजाना

    जागरण संवाददाता, बलरामपुर। 452 वर्ग किमी में फैला सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग जैव विविधता का खजाना है। यहां की अकूत वन संपदा अपने में प्राकृतिक छटाओं को समेटे हुए हैं। यहां दुर्लभ पशु पक्षियों की प्रजातियां कौतूहल का विषय हैं। साथ ही यहां की बेशकीमती जड़ी बूटियां व वनस्पतियां पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।

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    जंगल के बीच में निकले पहाड़ी नाले व जलाशय यहां आने वाले सैलानियों का मन मोह लेते हैं। जंगल में विदेशी परिंदों की अठखेलियां सोहेलवा की छटा में चार चांद लगा रही हैं। यहां की वादियां लोगों का बरबस ही मन माेह लेती हैं। साथ ही तीन टाइगर की मौजूदगी से वन विभाग उत्साहित है।

    सोहेलवा जंगल में कैमरे में कैद टाइगर - जागरण आर्काइव

    बलरामपुर व श्रावस्ती जिलों में सोहेलवा वन क्षेत्र नौ रेंजों में बंटा हुआ है। सभी रेंजों की सीमाएं नेपाल देश से जुड़ी हैं। दोनों देशों के जंगल की सीमाएं जुड़ी होने से सोहेलवा में रहने वाले जीव-जंतुओं के रहन-सहन व खानपान के लिए काफी मुफीद हैं।

    • 452 वर्ग किलोमीटर में फैले सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में दुलर्भ प्रजाति के जंगली जानवरों सहित तमाम प्रकार की औषधीय वनस्पतियां व जड़ी-बूटियां भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं।
    • सोहेलवा में पक्षियों की करीब 400 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें कुछ दुर्लभ पक्षी भी शामिल हैं। यहां पर भारी मात्रा में गिद्ध व विभिन्न प्रकार की चिड़ियां भी पाई जाती हैं।
    • 07 रेंजों में 17 प्रमुख पहाड़ी नालों का उद्गम सोहेलवा से ही है। साथ ही भांभर रेंज में चित्तौड़गढ़ व कोहरगड्डी, बरहवा रेंज में गिरगिटही और बनकटवा रेंज में खैरमान जलाशय जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक वरदान हैं।
    • 200 सीसी कैमरे साेहेलवा वन क्षेत्र में जानवरों की संख्या का आकलन और उनकी सुरक्षा करने के लिए लगवाए जा चुके हैं।
    • 7768 वन्यजीवों का सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में दीदार किया जा सकता है। साथ ही नेपाल में हिमालय की पर्वत श्रृंखला का अलग ही रोमांच मिलेगा।
    • 700 ट्रैकिंग कैमरा लगाने की योजना तैयार की जा रही है, जिससे टाइगर की वास्तविक संख्या का पता लग सके।
    • 452 वर्ग किमी क्षेत्रफल में है सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग :
    • 07 रेंज : पश्चिमी व पूर्वी सोहेलवा, बनकटवा, बरहवा, तुलसीपुर, रामपुर, भांभर
    पद मंजूर पद वर्तमान में पदस्थ
    रेंजर 10 6
    फारेस्ट गार्ड 56 21
    वन जीव रक्षक 8 3
    वन दारोगा 39 16
    डिप्टी रेंजर 9 3
    कुल कर्मचारी 122 49

    वन क्षेत्र में जानवरों की संख्या का अनुमान

    वन्यजीव प्रजाति अनुमानित संख्या
    टाइगर 02-04
    तेंदुआ 150-200 (दो प्रजाति)
    हाथी 05-10
    लकड़बग्घा 500-1000
    जंगली सूअर 1000+
    हिरन 400-500
    नीलगाय 500-1000
    छोटा चीतल 200-500

    जंगली सफारी से बढ़ेगा रोमांच 

    जैव विविधता को संजोए सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राष्ट्रीय उद्यान दुधवा की तर्ज पर सोहेलवा में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देकर पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां जंगल सफारी विकसित करने की योजना है। जंगलवर्ती गांव के लोगों को भी अपने घरों में छोटे-छोटे काटेज बनाने को प्रेरित किया जाएगा। इससे जंगल के बीच रहने वाली आबादी को रोजगार मिलेगा। साथ ही पर्यटकों के लिए बर्ड सिटिंग प्वाइंट, नेचर ट्रैक, बोटिंग व होम स्टे की सुविधा मिल सकेगी। प्रोजेक्ट टाइगर के लिए प्रयास चल रहा है।

    -डॉ. एम सेम्मारन, प्रभागीय वनाधिकारी

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