महिलाओें का दौड़ेगा कारोबार, समूहों को मिलेंगे 52.13 करोड़
- बलिया के 4500 स्वयं सहायता समूहों के लिए बजट स्वीकृत 1630 के खाते में धनराशि भेजने की तैय

- बलिया के 4500 स्वयं सहायता समूहों के लिए बजट स्वीकृत, 1630 के खाते में धनराशि भेजने की तैयारी
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- स्टार्ट अप, रिवाल्विग, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट और क्रेडिट लिमिट फंड से फायदा
- 2022-23 में महिला समूहों के ठहरे कार्यों को मिलेगी गति, महीनों से थी डिमांड
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किस मद से कितना मिलेगा बजट स्टार्ट अप
3700 समूह
92.50 लाख रुपये रिवाल्विग फंड
4500 समूह
6.75 करोड़ रुपये कम्युनिटी इंवेस्टमेंट फंड
2100 समूह
23.10 करोड़ रुपये कैश क्रेडिट लिमिट
2136 समूह
21.36 करोड़ रुपये
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संग्राम सिंह , बलिया : बसंतपुर गांव में सूरज महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य भाग्यमनी देवी की परचून की दुकान है, अब वह कारोबार को बड़ा करना चाह रही हैं। सोहांव बाजार में छोटा माल खोलकर कुछ और महिलाओं को अपने साथ जोड़ेंगी। आर्थिक समस्या उनके कदम रोक रही है। वह अपने नेक इरादों में सफल नहीं हो पा रही हैं। छह महीने पहले उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन को मदद की डिमांड की है। कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड से इन्हें 1.10 लाख रुपये की मदद मिलेगी। धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। दो महीने में रुपये भेज दिए जाएंगे।
दरअसल भाग्यमनी तो सिर्फ बानगी भर हैं। जिले के 4500 से अधिक महिला समूहों को वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए बजट स्वीकृत हुआ है। गांवों में इनके रुके हुए काम अब आगे बढ़ सकेंगे। स्टार्ट अप, रिवाल्विग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड और कैश क्रेडिट लिमिट के तहत करीब 52.13 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। चारों मदों के लिए बजट का आवंटन शुरू हो चुका है। 1630 समूहों की फाइल तैयार कर ली गई है। शासन की ओर से अनुमोदन भी मिल चुका है। बहुत जल्द महिलाएं एकजुट होकर कारोबार को बड़ा करेंगी।
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केस 1 : रसड़ा के बैजलपुर में नारी शक्ति स्वयं सहायता समूह की सदस्य सरोज और पुष्पा देवी दोना पत्तल का प्लांट लगवाना चाह रही हैं। यह अपने साथ 10 महिलाओं को जोड़कर व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाह रही हैं। इन्हें 50 हजार रुपये की जरूरत है। 18 मई को इनका आवेदन आया है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय अब सामुदायिक निधि से बजट आवंटित करने जा रहा है। जून तक समूह को धनराशि मिल जाएगी। केस 2 : गड़वार ब्लाक के सिकटौती गांव की गुंजन देवी प्रगति महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। इनके पास पहले से ही एक ई-रिक्शा है, दो साल से उन्हें काफी आमदनी हुई है। कुछ महिलाओं को अपने साथ जोड़कर काम कर रही हैं। अब वह एक और ई-रिक्शा खरीदना चाह रही हैं। विभाग में डिमांड कर चुकी हैं। सामुदायिक निधि से इन्हें आर्थिक मदद की तैयारी शुरू हो चुकी है।
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इस साल करीब छह हजार नए समूह गठित करने का लक्ष्य तय किया गया है। पुराने समूहों के लिए चार मदों के लिए शीघ्र धनराशि भेजी जाएगी। लंबे समय से समूहों की डिमांड थी। लेकिन जून से उनके खातों में स्वीकृत धनराशि भेजी जाने लगेगी। -- अभिषेक आनंद सिंह, जिला मिशन प्रबंधक, उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन
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