जागरण संवाददाता, बलिया : गंगा में पानी कम होने की वजह से एक माल वाहक जहाज महीने भर से अटका पड़ा है। पटना से चला मालवाहक जहाज भरौली-बक्सर के बीच में फंसा हुआ है। जहाज को चौसा तक जाना था। वहां से निर्माणाधीन पावर प्रोजेक्ट का सामान लेकर वापस पटना जाना था। बक्सर सीमा में सती घाट के सामने जहाज के फंसे होने से अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण की परेशानी बढ़ गई है। जहाज पर चालक और आठ सदस्य भी फंसे हुए हैं। रवींद्रनाथ टैगोर नामक इस जहाज को तीन दिन में चौसा पहुंचना था, लेकिन कम पानी में आकर फंस गया। दो-तीन दिन पहले दो छोटे जहाजों की मदद से इसे निकालने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। पानी एक मीटर से भी कम होने के कारण जहाज का निचला हिस्सा तलहटी में सट गया। इसके कारण वह टस से मस नहीं हो पा रहा। अब बारिश में पानी बढ़ने के बाद ही जहाज के आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सड़क पर बढ़ते वाहनों के दबाव तथा ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर जलमार्ग से माल ढुलाई बेहद सुगम सस्ती एवं सुरक्षित है। बिहार में हर तरफ चल रहे विकास कार्यों में खपत होने वाली निर्माण सामग्रियों की ढुलाई का जलमार्ग बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, लेकिन, बक्सर से गाजीपुर तक गंगा के जलस्तर में कमी हो जाने से इन जहाजों के परिचालन में रुकावट आ रही है। चालक दल के एक सदस्य ने बताया कि मालवाहक जहाज के चलने के लिए दो मीटर गहराई तक पानी अनिवार्य है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर में कमी तो हर साल होती है, लेकिन इस बार का नजारा कुछ अलग है। इस बार गंगा में जगह-जगह रेत के टीले दिखाई दे रहे हैं। नाविकों को साधारण नाव चलाने में भी परेशानी हो रही है।

लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बना जहाज

गंगा के किनारे खड़ा मालवाहक जहाज बच्चों तथा बड़ों सबके लिए उत्सुकता का विषय बना हुआ है। स्थानीय बच्चे प्रतिदिन शाम को जहाज पर जाकर खेलते-कूदते हैं। वहीं, जहाज पर मौजूद कर्मी भी बच्चों से घुल मिल गए हैं, वे भी उन्हें रोकते टोकते नहीं हैं।

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