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    कामेश्वर नाथ मंदिर, कारो

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 31 Jul 2018 09:12 PM (IST)

    जासं, बलिया: चितबड़ागांव क्षेत्र के कारो गांव स्थित कामेश्वर नाथ मंदिर सदियों से जन आस्था एवं श्र

    कामेश्वर नाथ मंदिर, कारो

    जासं, बलिया: चितबड़ागांव क्षेत्र के कारो गांव स्थित कामेश्वर नाथ मंदिर सदियों से जन आस्था एवं श्रद्धा का प्रमुख केंद्र रहा है। श्रावण मास में प्रत्येक वर्ष जलाभिषेक करने बाबा के दरबार में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि विश्वामित्र की तपस्थली बक्सर से बाबा के भक्त गंगाजल लेकर बाबा कामेश्वर नाथ पर अर्पित करते है। बाबा के अभिषेक करने से सारी मनोकामना पूरी है।

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    इतिहास

    महर्षि वाल्मीकि ने रचित रामायण में इस बात का उल्लेख है कि अपनी यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या से राम व लक्ष्मण को साथ लेकर महर्षि विश्वामित्र इसी मार्ग से गुजरे थे। साथ ही एक रात इसी कामेश्वर नाथ की तपोस्थली कामदवन में व्यतीत किए थे। बाल्मीकि रामायण के अनुसार इसी स्थान पर भगवान शिव ने उनकी तपस्या भंग करने का असफल प्रयास करने वाले कामदेव को अपने तीसरे नेत्र से भस्म किया था। बाबा कामेश्वर धाम का शिव¨लग स्वत: निकला माना जाता है।

    विशेषता

    बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर पर क्षेत्र ही नहीं बल्कि जनपद, पूर्वांचल तथा बिहार प्रांत के समीपवर्ती जनपद के लोग कामेश्वर नाथ का दर्शन अर्चन व पूजन करने आते हैं। कहा जाता है कि किसी कालखंड में यह क्षेत्र अवध राज्य के अंतर्गत आता था वहां के तत्कालीन नरेश पत्नी के साथ कामेश्वर नाथ का दर्शन पूजन करने आया करते थे। मंदिर के ठीक सामने स्थित पोखरा रानी पोखरा कहा जाता है क्योंकि अवध नरेश की रानी के स्नान करने के लिए ही राजा ने पोखरे का निर्माण कराया था।

    ----वर्जन---------

    बाबा कामेश्वर नाथ मंदिर में दर्शन पूजन और अभिषेक करने के लिए जो श्रद्धा स्त्री-पुरुष आते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं अवश्य पूरी हो जाती हैं बाबा कामेश्वर के दरबार से कोई व्यक्ति खाली हाथ निराश नहीं लौटता।

    -रमाशंकर दास, पुजारी। -----------वर्जन--------

    लंबे समय से प्रत्येक श्रावण मास में बक्सर उजियार घाट से गंगाजल भरकर कांवर के साथ पैदल तथा वाहनों के द्वारा मंदिर में जलाभिषेक करने हेतु पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा की पूरी व्यवस्था की गई है। पहले मंदिर में पहुंचने और लौटने का एक ही मार्ग था अब रानी पोखरा के उत्तरी किनारे पर भी एक मार्ग बन चुका है जो मुख्य सड़क से मंदिर को जोड़ रहा है दोनों मार्गों से श्रद्धालुओं के आने जाने की व्यवस्था है ताकि कोई किसी को किसी तरह की असुविधा ना हो सके।

    -कालीकान्त राय, ग्राम प्रधान कारो मन्दिर पर पहुंचने का मार्ग

    चितबड़ागांव-गाजीपुर मार्ग पर चितबड़ागांव से लगभग चार किमी पश्चिम धर्मापुर गांव के पास बने विशाल कामेश्वर धाम द्वार से दो किलोमीटर दक्षिण कामेश्वर नाथ मन्दिर स्थित है।