जागरण संवाददाता, बैरिया (बलिया) : श्रीनगर-तुर्तीपार तटबंध को बकुल्हा तटबंध से जोड़ने वाली मांझी घाट से दलछपरा तक की पुरानी रेलवे लाइन तटबंध के रूप में क्षेत्र को घाघरा के बाढ़ से बचाती रही है ¨कतु रख-रखाव व मरम्मत के अभाव में यह रेलवे लाइन (तटबंध) जर्जर हो चुका है। जगह-जगह जंगली जीव-जंतु इसमे ं'होल' बना चुके हैं। जिससे अगर बरसात के दिनों में घाघरा उफान पर होती है और बाढ़ के हालात होते हैं तो हालात काफी भयावह हो जाएंगे। माना जा रहा है कि पहले ही झटके में यह बांध टूट जाएगा जिससे क्षेत्र के बकुल्हा, नवका टोला, नेका राय के टोला, इब्राहिमाबाद, गोन्हिया छपरा, मधुबनी, बैजनाथपुर, बैजनाथ छपरा, चाई छपरा, उपाध्यापुर, गुमानी के डेरा, जगन के डेरा, हनुमानगंज, दुर्जनपुर, हेमंतपुर सहित दर्जनों गांव जलमग्न हो जाएंगे। बता दें कि एक दशक पूर्व पुराने बकुल्हा रेलवे स्टेशन के पास उक्त रेल लाइन (तटबंध) घाघरा के बाढ़ से टूट गया था। तब क्षेत्र के दर्जनों गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी ने कहा था कि बरसात बाद इस रेलवे लाइन (तटबंध) का मरम्मत कराऊंगा जिससे यह घाघरा के बाढ़ के पानी को रोकने में सक्षम हो सके ¨कतु एक दशक बीत गया फिर भी उक्त पुराने रेलवे लाइन का मरम्मत नहीं कराई गई। ¨सचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उक्त रेल लाइन भले ही तटबंध का काम कर रही हो ¨कतु वह रेलवे की संपत्ति है। उस पर प्रदेश सरकार कोई कार्य नहीं करा सकती है। अगर जनप्रतिनिधि अपनी तरफ से रूचि लें और रेलवे से एनओसी प्राप्त कराएं तब प्रदेश सरकार इसकी मरम्मत करा सकती है। इसके लिए धन की व्यवस्था भी सांसद अथवा विधायक को करनी पड़ेगी। लगभग 14 किमी लंबी पुरानी रेलवे लाइन (तटबंध) का मरम्मत जनहित में आवश्यक है इसलिए क्षेत्रीय सांसद या विधायक का ध्यान लोगों ने उस ओर आकृष्ट किया है।

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप