भारतेंदु हरिश्चंद्र से जुड़े एतिहासिक ददरी मेले की तैयारी पूरी, कई राज्यों से पहुंचते हैं लाखों लोग
बलिया में ऐतिहासिक ददरी मेले के आयोजन की तैयारियां 20 अक्टूबर को ध्वज पूजन के साथ शुरू होंगी। इस बार ...और पढ़ें

ददरी मेले के आयोजन की तैयारियां
HighLights
ददरी मेले का ध्वज पूजन 20 अक्टूबर को।
इस बार पशु मेला लगने की प्रबल संभावना।
नगर पालिका अध्यक्ष जिलाधिकारी से करेंगे मुलाकात।
जागरण संवाददाता, बलिया। एतिहासिक ददरी मेला के आयोजन की तैयारियों के क्रम में 20 अक्टूबर को परंपरागत रूप से ध्वज पूजन और स्थापना की जाएगी। नगर पालिका परिषद बलिया की ओर से दशहरा के अवसर पर दिन में 11 बजे से नंदीग्राम पशु मेला परिसर में पूजन कार्यक्रम आयोजित होगा।
साल 1884 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में लगने वाले ऐतिहासिक ददरी मेले में महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था।
इसके साथ ही ददरी मेला, नंदी ग्राम पशु मेला और मीना बाजार के आयोजन की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पिछले साल बलिया में लंपी रोग को देखते हुए मेले में पशु मेला नहीं लगा था, ऐसे में इस बार संभावना है कि पशु मेला लगे। इसके लिए नगर पालिका अध्यक्ष, जिलाधिकारी से मुलाकात करेंगे।
नगर पालिका परिषद बलिया के अध्यक्ष संत कुमार मिठाई लाल ने बताया कि परिषद की ओर से परंपरा के अनुसार एतिहासिक ददरी मेले का आयोजन कराया जाएगा। ध्वज पूजन कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद के सभासदों के साथ प्रभारी अधिशासी अधिकारी व नगर मजिस्ट्रेट उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा नगर पालिका के अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
कार्तिक पूर्णिमा के स्नान से लगभग 10 दिन पहले ही लग जाता पशु मेला
कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान से लगभग 10 दिन पहले ही देश-विदेश और विभिन्न राज्यों से पशु व्यापारी बलिया के ददरी मेला मैदान में जुटने लगते हैं। इस मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश से बड़े पैमाने पर पशुपालक और नामी व्यापारी आते हैं।
मेले में मुख्य रूप से गाय, भैंस, बैल, घोड़े, ऊंट, गधे और बकरियों का व्यापार होता है। विशेष रूप से हरियाणा की मुर्रा भैंसें और पंजाब-राजस्थान के उत्तम नस्ल के घोड़े यहां आकर्षण का केंद्र होते हैं।
ददरी मेला मुख्य रूप से शहर के दक्षिणी छोर पर लगभग 89 एकड़ (लगभग 140 बीघा) के विशाल क्षेत्र में आयोजित किया जाता है, जिसके लिए हर साल किराए पर इतनी भूमि अधिग्रहित की जाती है। इस बार भी करीब 800 से ज्यादा किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
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पिछले साल जिला प्रशासन व नगर पालिका परिषद के बीच हुआ था काफी टकराव
एतिहासिक ददरी मेले के आयोजन को लेकर पिछले वर्ष जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद के बीच काफी तीखा टकराव हुआ था। यह विवाद मुख्य रूप से मेले के नियंत्रण, बजट और अधिकारों को लेकर था। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष संत कुमार और जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच मेले की व्यवस्था अपने हाथों में लेने को लेकर खींचतान शुरू हुई।
प्रशासन का तर्क था कि उनके नियंत्रण में मेला आयोजित होने पर वित्तीय पारदर्शिता रहती है, जबकि पालिका अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि अधिकारी राजनीति से प्रेरित होकर उनके प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
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जिला प्रशासन ने मेले की तैयारियों में कमियों का हवाला देकर शासन को एक रिपोर्ट भेजी थी। इसके आधार पर शासन ने नगर पालिका अध्यक्ष की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को स्पष्टीकरण आने तक के लिए सीमित कर दिया था, जिससे विवाद और भड़क गया।
इस कार्रवाई से नाराज होकर नगर पालिका अध्यक्ष ने पूरे बोर्ड सदस्यों के साथ सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी तक दे डाली थी। यह विवाद इतना बढ़ गया कि आखिरकार नगर पालिका अध्यक्ष ने इसके खिलाफ कानूनी रास्ता चुना और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया था।
