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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 21, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'ताकि सुरक्षित रहे मेरा लाल...', गांवों में रातभर क्यों जाग रहे लोग? बच्चों को घर से बाहर भेजने को मजबूर

Published: Sun, 21 Sep 2025 08:17 PM (IST)Updated: Sun, 21 Sep 2025 08:20 PM (IST)

बहराइच के कैसरगंज रेंज में भेड़ियों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। पिछले 10 दिनों में दो बच्चों की ...और पढ़ें

भेड़ियों की दहशत से 15 गांवों में रातभर जाग रहे लोग।
भेड़ियों की दहशत से 15 गांवों में रातभर जाग रहे लोग।

HighLights

  1. भेड़ियों के आतंक से बहराइच में दहशत |
  2. 10 दिनों में दो बच्चों की मौत |
  3. ग्रामीण बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेज रहे |

राहुल यादव/अशर्फी पाठक, बहराइच। एक साल बाद फिर लौटे भेड़िये के आतंक से कैसरगंज रेंज के 15 गांवों में ग्रामीण दहशतजदा हैं। वन विभाग की 33 टीमों के हाथ खाली होने के बाद खुद ग्रामीणों ने लाठी-डंडा लेकर भेड़िये की तलाश शुरू कर दी है। बीते 10 दिन के अंदर दो बच्चों की मौत हो चुकी है, एक बच्चे का अभी तक कुछ सुराग नहीं लग पाया है।

12 से अधिक लोग भेड़िये के हमले में जख्मी हो चुके हैं। बढ़ते हमले से दहशत में आए ग्रामीणों ने अब अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए रिश्तेदारी में भेजने लगे है।

कैसरगंज रेंज के मंझारा तौकली गांव में बीते नौ सितंबर को भेड़िये ने पहला हमला कर बच्ची को अपना निवाला बनाया। इसके बाद रुक-रुककर हमले का सिलसिला जारी रहा। परागपुरवा गांव से शुरू हुआ हमला अब करीब 15 गांवों तक पहुंच चुका है।

भेड़िया छोटे बच्चों को जबड़े में दबोचकर ले जाकर अपना निवाला बना ले रहा है तो बड़ों पर हमला कर उन्हें जख्मी कर दे रहा है। बढ़ते हमले को देखते हुए ग्रामीणों ने पेड़ों पर मचान बनाकर अपना आशियाना बनाया। बावजूद हमला कम नहीं हुआ।

मां के सामने जब शनिवार सुबह भेड़िया तीन वर्षीय बालक को उठा ले गया और वन विभाग की टीम कुछ नहीं कर सकी। उसके बाद ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालने का निर्णय लिया। टोली बनाकर लाठी-डंडा लेकर खुद भेड़िये की तलाश में जुट गए है। वन विभाग की नाकामी से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।

घर से दूर जाने को मजबूर लोग

बढ़ते हमले को देखते हुए दयालपुरवा निवासी रामदीन ने अपने बेटे को उसके मामा के घर भेज दिया। कनछेद अपने परिवार के साथ लखनऊ चले गए। जगतपुरवा मंझारा गांव निवासी जगतराम अपने भतीजे को रिश्तेदारी में छोड़ आए हैं। इसी तरह गांव के कई लोग अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए रिश्तेदारी में छोड़ने के लिए विवश हैं।

इन गांवाें में है भेड़िये का खौफ

कैसरगंज रेंज के हरिरामपुरवा, नरेशपुरवा, रामशब्दपुरवा, इच्छारामपुरवा, शिलोचनपुरवा, हरिश्यामपुरवा, अनुरागपुरवा, गांधीगंज, गंधु झाला, कोनिया, भिरगूपुरवा, रोहितपुरवा, बबुरी, मंझारा तौकली व नंदवल के बोहरवा गांव में भेड़िये के हमले का आतंक है।

गश्ती टीमों द्वारा पैदल चलकर सक्रिय वन्यजीव को चिह्नित किए जाने व पग मार्ग को खोजने की कार्रवाई की जा रही है। वन्य जीव प्रभावित गांवों के बाहरी इलाकों में पटाखे दगाकर आबादी से दूर रखने की कार्रवाई की जा रही है। टीमें लगातार प्रयासरत है। -रामसिंह यादव, डीएफओ बहराइच।