बहराइच : मानसून की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है। चारों ओर किसान भगवान को कोस रहे हैं। खेतों में लगी धान की नर्सरी के साथ-साथ अन्य फसलें भी सूख रही हैं। बारिश न होने से खरीफ की बोआई पिछड़ती जा रही है। उमस भरी गर्मी से लोगों को निजात नहीं मिल रही है। बेरहम गर्मी न तो दिन में रहम करती है और न ही रात में नरम पड़ती है। मौसम वैज्ञानिकों की माने तो अभी मानसून आने की संभावना कम ही है।

खरीफ की फसलों की बोआई का समय लगभग हो चुका है, पर मानसून की देरी लोगों को बेहाल किए हुए है। जैसे-तैसे किसानों ने धान की नर्सरी तैयार तो कर ली, लेकिन अब यह नर्सरी ¨सचाई के अभाव में सूखने लगी है। यहां तक की खेतों में दरारें भी आ रही हैं। गन्ना व सब्जियों की फसलों पर भी मानसून की बेरुखी भारी पड़ रही है। यह फसलें भी अब सूखने लगीं हैं। किसानों की खरीफ की बोआई पीक पर पहुंचने वाला है, लेकिन बारिश को लेकर किसान हताश व निराश हैं। बारिश न होने से खेती का बजट भी बिगड़ता जा रहा है। जून महीना बीत रहा है, लेकिन एक भी बूंद पानी नहीं बरसा है। तपती धरती से आग निकल रही है। उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। मौसम वैज्ञानिक भी मानसून में देरी से फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं। फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. एमवी ¨सह बताते हैं कि अगले दो-तीन दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। सप्ताह के अंत तक मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि सोमवार को दिन का अधिकतम तापमान 42 व न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

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