बहराइच : कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग से होकर निकली घाघरा पर बने गिरिजा बैराज के फाटक नंबर 32 के पास रविवार की सुबह डॉल्फिन का शव उतराता मिला। दो सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु की मौत से फैले संक्रमण से मादा डॉल्फिन के मौत की पुष्टि हुई है।

कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के सदर बीट से होकर घाघरा नदी निकली है। इसी पर गिरिजा बैराज बना है। सुबह बैराज से होकर गुजर रहे लोगों की नजर डॉल्फिन के शव पर पड़ी। इसकी सूचना वन रक्षक अब्दुल सलाम को दी गई। वन विभाग की टीम नाव के सहारे बैराज में उतराते शव तक पहुंची। जाल डालकर शव को निकाला गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि मादा डॉल्फिन गर्भवती थी। पेट में ही उसके शिशु की मौत हो गई थी, जिससे संक्रमण फैल गया। 2.10 मीटर लंबाई होने के साथ 11 वर्ष डॉल्फिन की आयु है। सुजौली के पशु चिकित्सक एएम कटिहार व डॉ.भार्गव ने शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद शव को जला दिया गया।

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कतर्निया के कौड़ियाला नदी में पाई जाती हैं सर्वाधिक डॉल्फिन - कतर्नियाघाट वन्यजीव के बीच से होकर निकली कौड़ियाला नदी डॉल्फिन के प्रवास के लिए सबसे ज्यादा मुफीद है। प्रदेश में सर्वाधिक डॉल्फिन कौड़ियाला नदी में पाई जाती हैं। बावजूद सुरक्षा को लेकर वन महकमे के पास कोई ठोस इंतजाम नहीं है। दो हाथियों की भी हो चुकी है मौत

एक माह के अंदर कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में यह तीसरे संरक्षित जीव की मौत हुई है। इससे पहले दो हाथियों के भी शव मिल चुके हैं। हाथियों की मौत को आपसी संघर्ष बताया गया है। बैराज से मृत डॉल्फिन का शव बरामद किया गया है। पोस्टमार्टम के बाद डॉल्फिन के मौत की वजह संक्रमण पाया गया है।

यशवंत कुमार, डीएफओ, बहराइच

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